Mumbai: 1993 के दंगों में पुलिस बर्बरता का मामला, कोर्ट में गवाह ने सुनाई अपनी आपबीती

Maharashtra: मुंबई की एक सेशन कोर्ट में 1993 के दंगों के दौरान हुई पुलिस बर्बरता के मामले में एक बड़ा गवाह सामने आया है। 50 साल के इमाम कुतुबुद्दीन शेख ने अदालत में गवाही देते हुए बताया कि कैसे उस वक्त पुलिस ने बेगुनाह ल

Maharashtra: मुंबई की एक सेशन कोर्ट में 1993 के दंगों के दौरान हुई पुलिस बर्बरता के मामले में एक बड़ा गवाह सामने आया है। 50 साल के इमाम कुतुबुद्दीन शेख ने अदालत में गवाही देते हुए बताया कि कैसे उस वक्त पुलिस ने बेगुनाह लोगों पर जुल्म किए थे। उन्होंने कहा कि उस हादसे का दर्द उन्हें आज भी महसूस होता है।

यह पूरा मामला 9 जनवरी 1993 का है, जब मुंबई दंगों के दूसरे चरण के दौरान सुलेमान उस्मान बेकरी और उसके पास स्थित एक मदरसे पर पुलिस ने छापा मारा था। कुतुबुद्दीन शेख उस समय सिर्फ 17 साल के थे और मदरसे के छात्र थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उन्हें इतना पीटा कि वे बेहोश हो गए थे। उनके सिर और शरीर पर राइफल के बट, लाठियों और लातों से गंभीर चोटें आई थीं। इसी वजह से उन्हें तारीख याद करने में भी दिक्कत हुई, जिसे उन्होंने कोर्ट में स्पष्ट किया।

इस छापेमारी में आठ निहत्थे मुसलमान मारे गए थे, जिनमें बेकरी के पांच कर्मचारी और मदरसे के तीन लोग शामिल थे। कुतुबुद्दीन ने अपने शिक्षक मौलाना अब्दुल कासिम को भी पुलिस द्वारा पीटे जाते हुए देखा था। उन्होंने कोर्ट में यह सवाल भी उठाया कि जब दरवाजा अंदर से बंद था, तो पुलिस ने जबरन अंदर घुसने की कोशिश क्यों की।

इस मामले की कानूनी लड़ाई काफी लंबी रही है। 2003 में तत्कालीन जॉइंट सीपी (क्राइम) राम देव त्यागी और आठ अन्य आरोपियों को इस केस से बरी कर दिया गया था। हालांकि, बाकी नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ 2019 से ट्रायल चल रहा है, जिनमें से तीन की अब तक मौत हो चुकी है।

कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सरकारी वकील सचिन पाटिल ने गवाह से सवाल पूछने के लिए अदालत की अनुमति मांगी, जिसे जज एस बी दिगे ने मंजूर कर लिया। वहीं, बचाव पक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया गया जिसमें कुतुबुद्दीन शेख को ‘होस्टाइल विटनेस’ (गवाह का पलट जाना) घोषित करने की अपील की गई थी। बता दें कि कुतुबुद्दीन शेख ने पहले श्रीकृष्णा आयोग के सामने भी अपनी गवाही दी थी।