Maharashtra: देश में गर्भपात से जुड़े MTP कानून को लेकर अब बहस छिड़ गई है। मुंबई के मेडिकल फोरम में डॉक्टर्स और वकीलों ने चिंता जताई है कि मौजूदा कानून महिलाओं की अपनी मर्जी के बजाय डॉक्टरों की मंजूरी को ज्यादा महत्व देत
Maharashtra: देश में गर्भपात से जुड़े MTP कानून को लेकर अब बहस छिड़ गई है। मुंबई के मेडिकल फोरम में डॉक्टर्स और वकीलों ने चिंता जताई है कि मौजूदा कानून महिलाओं की अपनी मर्जी के बजाय डॉक्टरों की मंजूरी को ज्यादा महत्व देता है। हाल ही में कोर्ट के कुछ फैसलों के बाद अब इस कानून में बड़े बदलाव की मांग उठ रही है ताकि महिलाओं को उनके शरीर पर ज्यादा अधिकार मिल सकें।
MTP कानून में क्या हैं मुख्य समस्याएं?
कानूनी जानकारों जैसे दीपिका जैन और अनुभा रस्तोगी का कहना है कि यह कानून पूरी तरह से ‘डॉक्टर-केंद्रित’ है। इसमें डॉक्टर एक गेटकीपर की तरह काम करते हैं, जिससे महिलाओं के लिए गर्भपात की सुविधा पाना मुश्किल हो जाता है। वहीं गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. निखिल दातार ने बताया कि कानून की ड्राफ्टिंग काफी खराब है, जिससे इसे लागू करने में बहुत भ्रम पैदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि MTP एक्ट की शर्तों के बाहर गर्भपात कराने पर इसे भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट और हालिया विवादों का असर
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नाबालिगों के अनचाहे गर्भ के मामलों को देखते हुए कानून में बदलाव की जरूरत बताई है। कोर्ट का मानना है कि गर्भपात का फैसला नाबालिग और उसके माता-पिता का होना चाहिए, न कि सरकार का। हाल ही में Satara Civil Hospital के एक डॉक्टर पर FIR दर्ज हुई क्योंकि एक 16 साल की रेप सर्वाइवर का MTP फेल हो गया था। वहीं AIIMS के डॉक्टरों को भी सुप्रीम कोर्ट ने एक 15 साल की लड़की के 30 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने के लिए चेतावनी दी थी, जिसके बाद अस्पताल ने इसे पूरा किया।
MTP एक्ट के मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
1971 में बने इस कानून में 2021 में बदलाव किए गए थे। अब रेप सर्वाइवर, नाबालिग और दिव्यांग महिलाओं के लिए गर्भपात की समय सीमा बढ़ाकर 24 हफ्ते कर दी गई है। अगर मेडिकल बोर्ड को भ्रूण में गंभीर समस्या मिलती है, तो समय की कोई सीमा नहीं रहती। इसके बावजूद, डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया में ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MTP एक्ट 2021 के तहत गर्भपात की समय सीमा क्या है?
2021 के संशोधन के बाद रेप सर्वाइवर, नाबालिग और दिव्यांग महिलाओं के लिए यह सीमा 24 हफ्ते कर दी गई है। भ्रूण में गंभीर असामान्यता होने पर मेडिकल बोर्ड की सलाह से किसी भी समय गर्भपात संभव है।
सुप्रीम कोर्ट ने MTP कानून पर क्या टिप्पणी की है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रजनन स्वायत्तता जरूरी है और नाबालिगों के मामले में गर्भपात का निर्णय राज्य के बजाय नाबालिग और माता-पिता का होना चाहिए। कोर्ट ने नाबालिगों के लिए समय सीमा हटाने की बात भी कही है।