Maharashtra: महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बसों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक जरूरी खबर है। डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह से सरकार बस किराए में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। हालांकि, परिवहन मंत्री
Maharashtra: महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बसों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक जरूरी खबर है। डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह से सरकार बस किराए में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। हालांकि, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने साफ किया है कि फिलहाल किराए में कोई तुरंत बदलाव नहीं किया जाएगा।
किराया क्यों बढ़ाया जा सकता है और कितना है नुकसान
मंत्रालय में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में बताया गया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा दिए जाने वाले डीजल की कीमत एक हफ्ते में 88.21 रुपये से बढ़कर 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इस 3.10 रुपये की बढ़ोतरी से MSRTC पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ा है। अप्रैल 2026 में निगम को करीब 76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
| विवरण |
आंकड़े |
| दैनिक डीजल खपत |
10.87 लाख लीटर |
| दैनिक अतिरिक्त खर्च |
लगभग 33.7 लाख रुपये |
| मासिक अतिरिक्त बोझ |
करीब 10 करोड़ रुपये |
| सालाना कुल बोझ |
124 से 125 करोड़ रुपये |
क्या अब तुरंत बढ़ जाएगा बस का किराया
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने सोमवार, 18 मई 2026 को स्पष्ट किया कि किराए में कोई तत्काल वृद्धि नहीं होगी। किराए के बदलाव का प्रस्ताव अब राज्य परिवहन प्राधिकरण (State Transport Authority) को भेजा जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की सलाह और प्राधिकरण की मंजूरी के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।
आम जनता पर बोझ कम करने के लिए क्या उपाय होंगे
सरकार कोशिश कर रही है कि यात्रियों की जेब पर ज्यादा असर न पड़े। इसके लिए कुछ अन्य विकल्पों पर काम किया जा रहा है जैसे डीजल की बचत करना और ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारना। साथ ही निगम के खर्चों में कटौती और कमाई बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या ST बस का किराया अभी बढ़ गया है?
नहीं, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के अनुसार फिलहाल किराए में कोई तुरंत बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस पर अभी विचार चल रहा है।
किराया बढ़ाने का मुख्य कारण क्या है?
डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी मुख्य कारण है। डीजल के दाम 88.21 रुपये से बढ़कर 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं, जिससे निगम पर सालाना करीब 125 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।