MP के धार जिले में स्थित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस मामले में मंदिर पक्ष की ओर से लखनऊ के अधिवक्ता कुलदीप तिवारी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। कोर्ट ने अब इस पूर
MP के धार जिले में स्थित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस मामले में मंदिर पक्ष की ओर से लखनऊ के अधिवक्ता कुलदीप तिवारी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। कोर्ट ने अब इस पूरे मामले पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है।
भोजशाला केस में कोर्ट की ताजा स्थिति क्या है
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने 12 मई 2026 को इस विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी की। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने अपना आदेश सुरक्षित (reserved) कर लिया है। अभी तक कोर्ट की तरफ से कोई अंतिम निर्णय या लिखित कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है।
कौन हैं अधिवक्ता कुलदीप तिवारी और क्या है उनका रोल
कुलदीप तिवारी लखनऊ के रहने वाले वकील हैं जिन्होंने धार में मंदिर पक्ष की ओर से सालों तक पैरवी की है। उन्हें इस केस में मुख्य याचिकाकर्ता और वकील के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने साक्ष्यों और कानूनी बारीकियों के आधार पर मंदिर पक्ष की दलीलें कोर्ट के सामने रखीं।
1935 के नोटिफिकेशन पर क्या है विवाद
मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि 1935 में धार रियासत के एक नोटिफिकेशन के जरिए इस परिसर को मस्जिद घोषित किया गया था। उनका दावा है कि उस समय नमाज के लिए नियम तय किए गए थे और वह आदेश आज भी वैध है क्योंकि उसे अब तक रद्द नहीं किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भोजशाला केस में हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है
हाई कोर्ट ने 12 मई 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित (reserved) कर लिया है। अभी तक कोई अंतिम फैसला या लिखित आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ है।
मुस्लिम पक्ष का मुख्य तर्क क्या है
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि 1935 में धार रियासत द्वारा जारी नोटिफिकेशन में भोजशाला परिसर को मस्जिद घोषित किया गया था, जो आज भी प्रभावी है।