Mumbai में नालों की सफाई को लेकर MNS ने BMC पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- जनता को गुमराह कर रहा प्रशासन

Maharashtra: मुंबई में मानसून आने से पहले नालों की सफाई (desilting) को लेकर विवाद बढ़ गया है। MNS नेता और पूर्व नगरसेवक यशवंत किल्लेदार ने आरोप लगाया है कि बीएमसी और सत्ताधारी दल शहर के लोगों को गलत जानकारी दे रहे हैं। उ

Maharashtra: मुंबई में मानसून आने से पहले नालों की सफाई (desilting) को लेकर विवाद बढ़ गया है। MNS नेता और पूर्व नगरसेवक यशवंत किल्लेदार ने आरोप लगाया है कि बीएमसी और सत्ताधारी दल शहर के लोगों को गलत जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कागजों पर काम पूरा दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में कई इलाकों के नालों में अभी भी भारी मात्रा में गाद जमा है।

किल्लेदार ने शनिवार, 15 जून 2026 को वडाला, धारावी, गोवंडी, कुर्ला और मानखुर्द जैसे इलाकों की तस्वीरें पेश कीं। इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि नाले अभी भी कचरे और मिट्टी से भरे हुए हैं। MNS का दावा है कि बीएमसी अधिकारियों ने ठेकेदारों को पहले ही बता दिया था कि वे कब निरीक्षण के लिए आएंगे, जिससे ठेकेदारों ने केवल दिखावे के लिए कुछ हिस्सों की सफाई की ताकि काम पूरा होने का झूठा impression मिल सके।

दूसरी तरफ, Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने अपनी सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का सहारा लिया है। बीएमसी ने बताया कि इस सिस्टम के जरिए कई गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं, जिसके चलते ठेकेदारों पर 9.25 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना रिकॉर्ड में हेराफेरी, एक ही फोटो का बार-बार इस्तेमाल और वीडियो सबूतों की कमी के कारण लगाया गया है।

नालों की सफाई के साथ-साथ बाल श्रम का मामला भी सामने आया है। MNS कार्यकर्ता संजय बंसी रंडीवे ने वडाला के एक प्रदूषित नाले में बच्चों से काम कराने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसका वीडियो सबूत भी जुटाया है और मेयर रितु तावड़े और कमिश्नर अश्विनी भिड़े से दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बीएमसी के मुताबिक, छोटे नालों की सफाई 114.85% और बड़े नालों की 111.59% पूरी हो चुकी है, हालांकि मीठी नदी की सफाई में देरी हुई है और यह केवल 82.93% तक पहुंची है। कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने पहले सफाई के लिए 31 मई की डेडलाइन दी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 जून कर दिया गया था। अब MNS का कहना है कि इस बढ़ी हुई समय सीमा के बाद भी जमीनी हालात नहीं बदले हैं और शहर में जलभराव का खतरा बना हुआ है।