Mumbai में नहीं जा रहे प्रवासी पक्षी, मार्च के बाद भी तटों पर डेरा जमाए बैठे हैं हजारों पंछी

Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के तटीय इलाकों में एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी, जो आमतौर पर मार्च तक अपने घर लौट जाते हैं, अब भी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के तटों पर ही रुके हुए ह

Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के तटीय इलाकों में एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी, जो आमतौर पर मार्च तक अपने घर लौट जाते हैं, अब भी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के तटों पर ही रुके हुए हैं। जून के आखिरी हफ्ते तक इन पक्षियों की मौजूदगी ने बर्ड एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।

ठाणे क्रीक के कीचड़ भरे मैदानों और वेटलैंड्स में 24 जून के वीकेंड के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी देखे गए। इनमें Tibetan Sand Plovers, Greater Sand Plovers, Curlew Sandpipers, Ruddy Turnstones और Terek Sandpipers के साथ-साथ Lesser Flamingoes भी शामिल हैं। नियम के मुताबिक इन पक्षियों को मार्च तक मध्य एशिया और आर्कटिक के अपने प्रजनन क्षेत्रों में पहुंच जाना चाहिए था, जहां जून तक वे अपने बच्चों की परवरिश कर रहे होते हैं। लेकिन इस बार वे अपनी तय समय सीमा से काफी पीछे हैं और कुछ पक्षियों में प्रजनन के समय वाले रंग (breeding plumage) भी दिख रहे हैं।

इस बदलाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गर्मी का लंबा खिंचना और मानसून की देरी ने पक्षियों के प्रवास चक्र को प्रभावित किया है। मुंबई बर्ड कट्टा के संस्थापक और ऑर्निथोलॉजिस्ट Raju Kasambe ने बताया कि देरी से आए मानसून और हवाओं के असामान्य पैटर्न की वजह से ऐसा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इसके सटीक कारणों को समझने के लिए लंबे समय के डेटा की जरूरत है, ताकि यह पता चल सके कि क्या जलवायु परिवर्तन (climate change) इसका मुख्य कारण है।

मुंबई बर्डवाचर्स क्लब के संस्थापक Adesh Shivkar ने मई 2026 में फ्लेमिंगो के देर से आने को जलवायु का एक स्पष्ट संकेत बताया था। उनका कहना है कि पानी की उपलब्धता और मौसम के चक्र में बदलाव की वजह से पक्षी अपनी यात्रा टाल रहे हैं। वहीं, बर्ड काउंट इंडिया के रमेश शेनाई का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह कोई नया पैटर्न है या सिर्फ एक इत्तेफाक, क्योंकि मानसून के दौरान पक्षियों की निगरानी अब बढ़ी है। इस पूरे मामले पर Bombay Natural History Society (BNHS) जैसी संस्थाएं भी नजर रखे हुए हैं ताकि प्रवास के इन बदलते रुझानों को समझा जा सके।