Meerut को जाम से मिलेगी राहत, दिल्ली-हापुड़ रोड के बीच नए बाईपास का काम शुरू

UP: मेरठ के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. शहर में ट्रैफिक की समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली रोड और हापुड़ रोड के बीच एक नए बाईपास का निर्माण शुरू हो गया है. इस प्रोजेक्ट से छोटे वाहनों को भारी जाम से छुटकारा मिलेगा और

UP: मेरठ के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. शहर में ट्रैफिक की समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली रोड और हापुड़ रोड के बीच एक नए बाईपास का निर्माण शुरू हो गया है. इस प्रोजेक्ट से छोटे वाहनों को भारी जाम से छुटकारा मिलेगा और सफर पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा.

नया बाईपास कहां से कहां तक होगा और क्या है खासियत

यह बाईपास मेरठ के Partapur से शुरू होकर Gagol होते हुए Phaphunda तक जाएगा. इसकी कुल लंबाई लगभग 12.330 किलोमीटर है. इसमें से करीब 7.5 किलोमीटर वाले हिस्से को, जो अभी सिंगल लेन है, उसे चौड़ा करके दो लेन से ज्यादा बनाया जा रहा है. इससे बिजली बंबा बाईपास पर लगने वाले जाम का विकल्प मिलेगा और गाड़ियां तेजी से निकल सकेंगी.

कितनी लागत आएगी और जमीन का क्या है स्टेटस

PWD (लोक निर्माण विभाग) के मुताबिक इस सड़क को चौड़ा करने और बनाने में करीब 9 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए 5 गांवों (Gagol, Khera Balrampur, Azizpur, Chandsara और Salempur) से कुल 19,259 वर्ग मीटर जमीन ली जा रही है. प्रशासन ने मुआवजे के लिए 14 करोड़ रुपये तय किए थे, जिसमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा रकम किसानों को दी जा चुकी है.

काम की मौजूदा स्थिति और आगे की योजना

PWD के अधिशासी अभियंता सत्येंद्र सिंह ने बताया कि करीब 3 किलोमीटर हिस्से में सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू हो चुका है. इस प्रोजेक्ट में बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने का काम भी शामिल है. उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब एक साल पहले इस बाईपास को मंजूरी दी थी, जिसके बाद अब जमीन अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

दिल्ली-हापुड़ नए बाईपास से मेरठ के लोगों को क्या फायदा होगा?

इस बाईपास के बनने से छोटे वाहनों को शहर के भारी जाम से मुक्ति मिलेगी और दिल्ली रोड से हापुड़ रोड जाना आसान हो जाएगा. यह बिजली बंबा बाईपास के ट्रैफिक का एक बेहतर विकल्प बनेगा.

इस प्रोजेक्ट के लिए किन गांवों की जमीन ली जा रही है?

इस बाईपास के लिए मेरठ के पांच गांवों – गगौल, खेड़ा बलरामपुर, अजीजपुर, चांदसरा और सालेमपुर से जमीन ली जा रही है, जिसका 90% से ज्यादा मुआवजा किसानों को मिल चुका है.