Delhi: दिल्ली को कचरा मुक्त बनाने के लिए MCD ने IIT Delhi के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस पार्टनरशिप का मुख्य मकसद शहर में ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ के लक्ष्य को पूरा करना है। अब शहर के कचरे को ठिकाने लगाने क
Delhi: दिल्ली को कचरा मुक्त बनाने के लिए MCD ने IIT Delhi के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस पार्टनरशिप का मुख्य मकसद शहर में ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ के लक्ष्य को पूरा करना है। अब शहर के कचरे को ठिकाने लगाने के लिए सिर्फ लैंडफिल साइट्स पर निर्भर नहीं रहा जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक तरीकों और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्या है यह नया प्लान और कैसे काम करेगा
इस प्रोजेक्ट के तहत IIT Delhi शहर और वार्ड लेवल पर ठोस कचरा प्रबंधन की एक पूरी योजना तैयार करेगा। इसमें GIS मैपिंग के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि शहर के किन हिस्सों में कितना कचरा पैदा हो रहा है। साथ ही, उन जगहों की पहचान की जाएगी जहां कचरा ज्यादा जमा होता है और वहां के बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया अगले छह महीने तक चलेगी, लेकिन मॉनिटरिंग का काम एक साल तक जारी रहेगा।
आम जनता और RWAs की क्या होगी भूमिका
MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने बताया कि इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए आम नागरिकों, Resident Welfare Associations (RWAs) और सफाई कर्मचारियों की भागीदारी बहुत जरूरी है। नए नियमों के मुताबिक, अब कचरे को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटकर (Source Segregation) देना होगा। इसके अलावा, जो बड़ी सोसायटियां या संस्थान ज्यादा कचरा पैदा करते हैं (Bulk Waste Generators), उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी ताकि कचरा कम से कम लैंडफिल तक पहुंचे।
प्रोजेक्ट की लागत और मुख्य लक्ष्य
इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1.94 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस राशि का इस्तेमाल सर्वे, ट्रेनिंग प्रोग्राम और नई टेक्नोलॉजी को लागू करने में किया जाएगा। दिल्ली में हर दिन लगभग 12,500 टन कचरा निकलता है, जिसे संभालने के लिए मौजूदा सिस्टम काफी नहीं है। इसलिए अब डिसेंट्रलाइज्ड वेस्ट मैनेजमेंट यानी कचरे को वहीं प्रोसेस करने पर जोर दिया जाएगा जहां वह पैदा हो रहा है। यह पूरी पहल अप्रैल 2026 से लागू हुए Solid Waste Management (SWM) Rules, 2026 के आधार पर की जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जीरो वेस्ट टू लैंडफिल का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि शहर का कचरा लैंडफिल साइट्स (कूड़े के पहाड़ों) पर भेजने के बजाय उसे वैज्ञानिक तरीके से रिसाइकिल और प्रोसेस किया जाए, ताकि जमीन पर कचरा जमा न हो।
इस प्रोजेक्ट में आम लोगों को क्या करना होगा?
आम नागरिकों और RWAs को कचरे को स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देना होगा, ताकि उसे आसानी से प्रोसेस किया जा सके।