Delhi: राजधानी दिल्ली को कचरे के ढेरों से मुक्ति दिलाने के लिए MCD और IIT Delhi ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मुख्य मकसद डिजिटल निगरानी और कचरे को अलग-अलग करने के तरीके को बेहतर बनाना है ताकि शहर में ‘लैंडफिल मे
Delhi: राजधानी दिल्ली को कचरे के ढेरों से मुक्ति दिलाने के लिए MCD और IIT Delhi ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मुख्य मकसद डिजिटल निगरानी और कचरे को अलग-अलग करने के तरीके को बेहतर बनाना है ताकि शहर में ‘लैंडफिल में शून्य अपशिष्ट’ का लक्ष्य हासिल किया जा सके। यह पूरी योजना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 के आधार पर तैयार की गई है।
इस नई योजना में क्या खास होगा और IIT Delhi की क्या भूमिका है
IIT Delhi इस प्रोजेक्ट में नॉलेज पार्टनर की तरह काम करेगी। संस्थान कचरे का डेटा इकट्ठा करेगा, GIS-आधारित मैपिंग करेगा और यह देखेगा कि शहर में कचरा जमा करने के लिए बुनियादी ढांचे में कहां कमी है। इसके अलावा, डिजिटल निगरानी सिस्टम विकसित किया जाएगा ताकि पता चल सके कि कचरा सही तरीके से उठाया और प्रोसेस किया जा रहा है या नहीं। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1.94 करोड़ रुपये है और यह शुरुआती तौर पर छह महीने तक चलेगा।
आम लोगों और कॉलोनियों पर क्या असर पड़ेगा
MCD अब ‘संग्रह-केंद्रित’ मॉडल को छोड़कर ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ (Circular Economy) मॉडल पर काम करेगी। अब कचरे को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटकर (Four-stream segregation) इकट्ठा किया जाएगा। MCD ने जीरो वेस्ट कॉलोनियों और संस्थानों के लिए एक SOP भी जारी की है। अधिकारियों का मानना है कि अगर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और नागरिक सहयोग करें, तो दिल्ली के लगभग 30% कचरे को स्रोत स्तर पर ही प्रोसेस किया जा सकता है, जिससे लैंडफिल साइटों पर बोझ कम होगा।
दिल्ली में कचरे की वर्तमान स्थिति क्या है
दिल्ली में हर दिन लगभग 11,862 से 12,500 टन तक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट पैदा होता है। फिलहाल शहर की कुल कचरा प्रसंस्करण क्षमता 8,173 टन प्रतिदिन है, जो कि जरूरत से काफी कम है। MCD आयुक्त संजीव खीरवार ने साफ कहा है कि दिल्ली अब लैंडफिल पर निर्भर नहीं रह सकती, इसलिए वैज्ञानिक और टेक्नोलॉजी आधारित तरीकों को अपनाना जरूरी हो गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लैंडफिल में शून्य अपशिष्ट का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि शहर का सारा कचरा वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाए और रिसाइकिल हो, ताकि अंत में कोई भी कचरा लैंडफिल या कचरे के पहाड़ों में न जाए।
इस प्रोजेक्ट में आम नागरिकों को क्या करना होगा?
नागरिकों और RWA को कचरे को स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना होगा, ताकि उसे आसानी से प्रोसेस किया जा सके और जीरो वेस्ट कॉलोनी का लक्ष्य पूरा हो।