Lucknow में मौलाना आमिर रशादी ने 10 अगस्त को मनाया ‘अन्याय दिवस’, पसमांदा मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग

Lucknow: राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने 10 अगस्त को ‘अन्याय दिवस’ के रूप में मनाया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि अनुस

Lucknow: राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने 10 अगस्त को ‘अन्याय दिवस’ के रूप में मनाया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि अनुसूचित जाति (SC) की सूची में लगाए गए धार्मिक प्रतिबंधों को हटाया जाए ताकि पसमांदा मुसलमानों और ईसाइयों को आरक्षण का लाभ मिल सके।

मौलाना रशादी ने बताया कि 10 अगस्त 1950 को अनुसूचित जाति की सूची में धार्मिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसे वे एक ऐतिहासिक अन्याय मानते हैं। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल पिछले करीब दो दशकों से इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान और आंदोलन चला रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार वास्तव में पसमांदा मुसलमानों की भलाई चाहती है, तो उसे केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सरकार को अनुच्छेद 341 में लगे धार्मिक प्रतिबंध को हटाकर आरक्षण देना चाहिए, तभी यह साबित होगा कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास रखती है।

इस मुद्दे पर कानूनी स्थिति काफी जटिल है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों तक सीमित है। अगर कोई व्यक्ति ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाता है, तो उसका यह दर्जा खत्म हो जाता है। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया और 24 मार्च 2026 के अपने पुराने फैसले को बरकरार रखा।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने भी इस मांग पर अपनी स्थिति साफ की है। अप्रैल 2026 में लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार न तो अभी ऐसा आरक्षण देगी और न ही भविष्य में किसी को ऐसा करने देगी। हालांकि, फरवरी 2026 में पसमांदा मुसलमानों के लिए OBC आरक्षण की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक तौर पर कहा था कि OBC आरक्षण के लिए सामाजिक स्थिति के साथ आर्थिक स्थिति भी एक जरूरी कारक होती है।