Haryana : गुरुग्राम की एक अदालत ने मानेसर के बल्सोनिका (Belsonica) कंपनी के कर्मचारी यूनियन के महासचिव अजीत सिंह को जमानत दे दी है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अजीत सिंह को एक महीने तक अ
Haryana : गुरुग्राम की एक अदालत ने मानेसर के बल्सोनिका (Belsonica) कंपनी के कर्मचारी यूनियन के महासचिव अजीत सिंह को जमानत दे दी है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अजीत सिंह को एक महीने तक अवैध हिरासत में रखा गया। अदालत के मुताबिक, उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।
अजीत सिंह को जमानत क्यों मिली और कोर्ट ने क्या कहा?
गुरुग्राम की एडिशनल सेशन जज डॉ. गगन गीत कौर ने जमानत देते हुए साफ किया कि कर्मचारियों द्वारा सरकार से वेतन बढ़ाने की मांग करना कोई अपराध नहीं है। कोर्ट ने माना कि अजीत सिंह ने एक यूनियन सदस्य के तौर पर लोकतांत्रिक तरीके से कम वेतन का मुद्दा उठाया था। जज ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि जब कोई सबूत नहीं था, तो उन्हें एक महीने तक हिरासत में क्यों रखा गया।
क्या था पूरा मामला और पुलिस के आरोप?
यह मामला 9 अप्रैल को मानेसर के IMT स्थित रिचा ग्लोबल एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में हुए मजदूर विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान 200-250 लोगों की भीड़ ने पत्थरबाजी और आगजनी की थी। पुलिस ने अजीत सिंह पर व्हाट्सएप मैसेज के जरिए मजदूरों को भड़काने का आरोप लगाया था। हालांकि, सरकारी वकील ने कोर्ट में स्वीकार किया कि हिंसा वाले दिन अजीत सिंह मौके पर मौजूद नहीं थे।
किन धाराओं के तहत दर्ज था केस?
पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने और काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस का दावा था कि विरोध प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए यह कार्रवाई जरूरी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे गलत पाया और अजीत सिंह को रिहा करने का आदेश दिया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अजीत सिंह कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया था?
अजीत सिंह मानेसर की बल्सोनिका कंपनी के कर्मचारी यूनियन के महासचिव हैं। उन्हें 9 अप्रैल को रिचा ग्लोबल एक्सपोर्ट्स में हुए मजदूर विरोध प्रदर्शन और हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि अजीत सिंह को बिना किसी पुख्ता सबूत के एक महीने तक अवैध हिरासत में रखा गया और वेतन बढ़ाने की मांग करना कोई कानूनी अपराध नहीं है।