Lucknow क्लब में मेजर ए.के. सिंह ने साझा किए समुद्री यात्रा के अनुभव, एक पैर गंवाने के बाद भी किया था दुनिया का चक्कर
Lucknow: लखनऊ क्लब में ‘समुद्री यात्रा वृतांत’ विषय पर एक खास चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में मेजर ए.के. सिंह ने अपने जीवन के संघर्ष और समुद्र की लहरों के बीच बिताए समय के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे श
Lucknow: लखनऊ क्लब में ‘समुद्री यात्रा वृतांत’ विषय पर एक खास चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में मेजर ए.के. सिंह ने अपने जीवन के संघर्ष और समुद्र की लहरों के बीच बिताए समय के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया।
मेजर ए.के. सिंह की कहानी साहस की एक बड़ी मिसाल है। उन्होंने एक पैर गंवाने के बाद भी हार नहीं मानी और दुनिया की समुद्री परिक्रमा करने का अपना सपना पूरा किया। वह ऐसा करने वाले पहले विकलांग व्यक्ति बने। उनकी यह यात्रा केवल शारीरिक चुनौती नहीं, बल्कि उनके मजबूत इरादों की जीत थी।
मेजर सिंह ने अपनी इन यादों और अनुभवों को ‘बियॉन्ड हॉराइजन्स’ नाम की एक किताब में लिखा है। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में टॉप करने वाले और ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित अधिकारी रहे हैं। उन्हें देश की सेवा के लिए कीर्ति चक्र से भी नवाजा गया है।
उनकी सबसे महत्वपूर्ण यात्राओं में साल 1987 की समुद्री यात्रा शामिल थी। उन्होंने ‘त्रिशना’ नाम की 37 फुट की नौका पर सेना के अधिकारियों के साथ दुनिया का चक्कर लगाया था। इस यात्रा के दौरान उन्होंने 15 महीने से ज्यादा समय बिताया और करीब 50,000 किलोमीटर की दूरी तय की थी।