Maharashtra में MahaRERA की सख्ती, 9 हजार से ज्यादा हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को नोटिस, 15 करोड़ का जुर्माना
Maharashtra: राज्य में घर खरीदने वालों के हितों की रक्षा के लिए MahaRERA ने कड़ा रुख अपनाया है। तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) अपडेट न करने वाले 9,177 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, नियमों
Maharashtra: राज्य में घर खरीदने वालों के हितों की रक्षा के लिए MahaRERA ने कड़ा रुख अपनाया है। तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) अपडेट न करने वाले 9,177 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, नियमों की अनदेखी करने वाले बिल्डरों पर 15 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है।
इस कार्रवाई के बाद अब कानूनी विशेषज्ञों और हाउसिंग एक्टिविस्ट्स ने मांग की है कि MahaRERA को प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। उनका कहना है कि बिल्डरों द्वारा दी गई जानकारी की बारीकी से जांच करने के लिए वर्तमान सिस्टम काफी नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रैंडम इंस्पेक्शन और टेक-ड्रिवन ऑडिट से यह पता चल सकेगा कि प्रोजेक्ट वास्तव में कागजों पर बताई गई स्थिति में है या नहीं।
MahaRERA के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि राज्य में करीब 54,000 रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स हैं, इसलिए हर एक सबमिशन की मैन्युअल जांच करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। फिलहाल विभाग का मुख्य ध्यान ग्राहकों की शिकायतों को सुलझाने पर है। हालांकि, MahaRERA के चेयरमैन मनोज सौनिक ने साफ किया है कि अगर रिमाइंडर्स के बाद भी बिल्डर अपनी रिपोर्ट अपडेट नहीं करते हैं, तो प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द या सस्पेंड करने में संकोच नहीं किया जाएगा।
तकनीक के इस्तेमाल को लेकर पहले भी कुछ कदम उठाए गए हैं। फरवरी 2024 में MahaRERA और ASCI के बीच एक समझौता हुआ था, ताकि AI के जरिए उन विज्ञापनों को पकड़ा जा सके जिनमें रजिस्ट्रेशन नंबर और QR कोड नहीं होते। इसके अलावा, जुलाई 2024 में यह घोषणा की गई थी कि AI टूल्स के जरिए प्रोजेक्ट्स की तकनीकी, वित्तीय और कानूनी स्थिति के आधार पर उनकी ग्रेडिंग की जाएगी। पूर्व चेयरमैन अजय मेहता ने भी विज्ञापनों में अनिवार्य QR कोड पर जोर दिया था ताकि आम खरीदार आसानी से प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी पा सकें।