Maharashtra में अब महिलाओं को मिलेगा किसान का दर्जा, सरकार लाई नया बिल, बिना जमीन के भी मिलेगा फायदा
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की महिला किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक, 2026’ (Maharashtra Women Farmers Empowerment
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की महिला किसानों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक, 2026’ (Maharashtra Women Farmers Empowerment Bill, 2026) पेश किया गया। इस बिल का मुख्य मकसद खेती-किसानी से जुड़ी महिलाओं को कानूनी रूप से किसान के तौर पर पहचान दिलाना है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने इस बिल को विधानसभा में रखा। इससे पहले 26 जून को कैबिनेट ने इस ड्राफ्ट को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में 81 प्रतिशत से ज्यादा काम महिलाएं करती हैं, लेकिन जमीन उनके नाम न होने की वजह से उन्हें किसान नहीं माना जाता था और वे कई सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाती थीं। अब इस नए कानून के बाद जमीन के मालिकाना हक के बिना भी महिलाओं को स्वतंत्र किसान के रूप में मान्यता मिलेगी।
इस बिल के तहत ‘किसान’ की परिभाषा को काफी बड़ा किया गया है। अब इसमें जमीन मालिक महिलाओं के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम उत्पादन, बागवानी, मशरूम की खेती और वनोपज इकट्ठा करने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया है। साथ ही बटाईदार, खेतिहर मजदूर और प्रवासी कृषि श्रमिकों को भी यह लाभ मिलेगा।
महिलाओं को आधिकारिक पहचान दिलाने के लिए ‘महिला किसान प्रमाण पत्र’ (women farmer certificates) जारी किए जाएंगे। इन सर्टिफिकेट्स के लिए ग्राम सभा या शहरी स्थानीय निकायों के जरिए आवेदन करना होगा। इस पहचान पत्र की मदद से महिलाएं सरकारी सब्सिडी, बीज, खाद, फसल बीमा, संस्थागत ऋण (लोन) और बाजार सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगी।
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक डिजिटल सिस्टम बनाने की योजना बनाई है। साथ ही एक ‘महाराष्ट्र राज्य महिला किसान कोष’ (Maharashtra State Women Farmers Fund) और डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। जिला और तालुका स्तर पर महिला किसान सहायता अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो महिलाओं को सर्टिफिकेट बनवाने और नई खेती तकनीकों को अपनाने में मदद करेंगे। इस पूरे सिस्टम की निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक राज्य स्तरीय समिति करेगी।