Maharashtra में वेतन कटौती की धमकी के बाद भी स्कूलों में तालाबंदी, BLO ड्यूटी के खिलाफ हजारों शिक्षकों का प्रदर्शन
Maharashtra: राज्य के हजारों शिक्षकों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ड्यूटी और अन्य सरकारी कामों के विरोध में राज्य के 60% से ज्यादा सरकारी और सहायता प्
Maharashtra: राज्य के हजारों शिक्षकों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ड्यूटी और अन्य सरकारी कामों के विरोध में राज्य के 60% से ज्यादा सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल बंद रहे। सरकार ने वेतन काटने की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया।
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पढ़ाने के बजाय वोटर लिस्ट और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसे कामों में झोंक दिया गया है, जिससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है और सिलेबस समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन के लिए कई शिक्षक संघ एक साथ आए, जिनमें महाराष्ट्र स्टेट प्राइमरी टीचर्स कमेटी और शिक्षक महासंघ जैसे संगठन शामिल थे। मुंबई के आजाद मैदान में भी भारी भीड़ जुटी।
इस मामले में सरकार का रुख सख्त रहा। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा के निदेशक महेश पाल्कर ने 7 जुलाई को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि 9 जुलाई को कोई भी स्कूल बंद नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर स्कूल बंद रहते हैं, तो प्रिंसिपल, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा जाएगा।
शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर कुछ अहम मुद्दे उठाए हैं:
- BLO ड्यूटी पूरी तरह खत्म की जाए।
- BLO ड्यूटी न करने वाले शिक्षकों पर दर्ज FIR वापस ली जाए।
- 2013 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET नियमों में ढील दी जाए या आसान पात्रता परीक्षा हो।
- पुरानी प्रमोशन पॉलिसी को फिर से लागू किया जाए।
शिक्षकों का तर्क है कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, शिक्षकों को BLO तभी बनाया जाना चाहिए जब गांव में कोई अन्य सरकारी कर्मचारी उपलब्ध न हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इस नियम का पालन नहीं हो रहा है। वहीं, BLO ड्यूटी इंजस्टिस रिड्रेसल फोरम ने इस मामले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि निजी सहायता प्राप्त स्कूलों के कर्मचारियों को ऐसी ड्यूटी पर लगाना गलत है।