Maharashtra में ST हॉस्टल छात्रों के विरोध पर रोक हटाने का फैसला, एडमिशन के लिए बढ़ाई गई उम्र की सीमा
Maharashtra: राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति (ST) हॉस्टल के छात्रों के लिए जारी एक विवादित आदेश को वापस ले लिया है। अब छात्र भूख हड़ताल और विरोध मार्च जैसे प्रदर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही सरकार ने हॉस्टल में एडमिशन के लिए
Maharashtra: राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति (ST) हॉस्टल के छात्रों के लिए जारी एक विवादित आदेश को वापस ले लिया है। अब छात्र भूख हड़ताल और विरोध मार्च जैसे प्रदर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही सरकार ने हॉस्टल में एडमिशन के लिए अधिकतम आयु सीमा को 26 साल से बढ़ाकर 30 साल कर दिया है।
दरअसल, 5 अगस्त 2026 को राज्य सरकार ने एक आदेश निकाला था जिसमें ST हॉस्टल के छात्रों के प्रदर्शनों और भूख हड़ताल पर रोक लगा दी गई थी। आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा था कि इसका मकसद पढ़ाई का माहौल बनाए रखना है। साथ ही हॉस्टल एडमिशन के लिए 26 साल की उम्र तय की गई थी। इस फैसले के बाद राज्यभर में छात्रों के बीच भारी गुस्सा फैल गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान नागपुर में आदिवासी विकास के अतिरिक्त आयुक्त कार्यालय के बाहर 1,000 से ज्यादा छात्र धरने पर बैठ गए। 14 अगस्त 2026 को भंडारा के एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कार्यालय में भी सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया। गोंदिया के देओरी की छात्रा मैना सलामे जैसे कई छात्रों का कहना था कि ये पाबंदियां उनकी अभिव्यक्ति की आजादी का हनन हैं। आदिवासी विद्यार्थी संघ के नेता नरेश नइतम और अजय गावड़कर ने इस सर्कुलर को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व किया।
छात्रों के बढ़ते विरोध को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अपना फैसला बदल दिया। शुक्रवार को एक नया संशोधित सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया गया। इस नए आदेश के जरिए प्रदर्शनों पर लगी रोक हटा ली गई और एडमिशन के लिए उम्र की सीमा को बढ़ाकर 30 साल कर दिया गया है।