Maharashtra: स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी कानून के खिलाफ कांग्रेस की याचिका पर हंगामा, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज ने खुद को अलग किया
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए गए स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी (MSPS) एक्ट को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। सोमवार, 10 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम ए अंखद ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर ल
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए गए स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी (MSPS) एक्ट को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। सोमवार, 10 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस गौतम ए अंखद ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह मामला उस कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसे कांग्रेस, सीपीआई और एआईटीयूसी ने अदालत में चुनौती दी है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने इन याचिकाओं को ‘फ्रीवोलस’ यानी तुच्छ बताया और इन्हें खारिज करने की मांग की। सरकार का कहना है कि यह कानून वामपंथी उग्रवादी संगठनों या उनके जैसे अन्य संगठनों की अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया है।
दूसरी तरफ, एआईटीयूसी की तरफ से सीनियर एडवोकेट नवरोज सीरवाई ने दलील दी कि यह कानून असंवैधानिक है। वहीं कांग्रेस और सीपीआई की वकील सीनियर एडवोकेट गायत्री सिंह ने कहा कि यह कानून सरकार को मनमाने और अत्यधिक अधिकार देता है, जिसमें न्यायिक निगरानी की कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाया जाएगा।
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा ने जुलाई 2025 में इस कानून को पास किया था और दिसंबर 2025 में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। इस कानून के तहत चार मुख्य अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है:
- किसी गैरकानूनी संगठन का सदस्य होना।
- गैर-सदस्य द्वारा ऐसे संगठन के लिए फंड जुटाना।
- संगठन के प्रबंधन में मदद करना।
- कोई ‘अवैध गतिविधि’ करना।
इस एक्ट के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार मिलता है कि वह किसी भी संदिग्ध संगठन को ‘गैरकानूनी’ घोषित कर सकती है।