Maharashtra: एक तरफ राज्य सरकार स्कूलों में AI क्लासरूम और स्मार्ट बोर्ड जैसी आधुनिक तकनीक ला रही है, लेकिन दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं की हालत खराब है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 890 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्क
Maharashtra: एक तरफ राज्य सरकार स्कूलों में AI क्लासरूम और स्मार्ट बोर्ड जैसी आधुनिक तकनीक ला रही है, लेकिन दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं की हालत खराब है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 890 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं है। इस वजह से छात्राओं की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा समस्या है?
राज्य के कुल 29,641 स्कूलों में से करीब 3% स्कूलों में यह कमी पाई गई है। सबसे खराब स्थिति बीड जिले की है, जहाँ 112 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। इसके अलावा अन्य प्रभावित जिलों की लिस्ट नीचे दी गई है:
| जिला |
स्थिति |
| Beed |
सबसे अधिक (112 स्कूल) |
| Hingoli, Nanded, Parbhani |
50 से 100 स्कूल |
| Gadchiroli, Jalgaon, Amravati |
50 से 100 स्कूल |
| Nashik, Sindhudurg |
50 से 100 स्कूल |
सरकारी नियम और कोर्ट की टिप्पणी क्या है?
RTE Act 2009 के तहत हर मान्यता प्राप्त स्कूल में लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय होना जरूरी है। महाराष्ट्र स्कूल शिक्षा विभाग ने 11 अक्टूबर 2025 को भी गाइडलाइन जारी की थी कि स्कूलों में साफ शौचालय के साथ सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर और इंसिनरेटर होने चाहिए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सरकार को कई बार फटकार लगाई है। कोर्ट ने सितंबर 2022 में शौचालयों की स्थिति को बहुत खराब बताया था और अक्टूबर 2023 में सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई थी।
शिक्षा विभाग के आंकड़े क्या कहते हैं?
शिक्षा विभाग की एक रिपोर्ट (जनवरी-फरवरी 2026) के अनुसार, पहले 1,164 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं थे और 3,328 स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुरक्षित और साफ शौचालय न होने की वजह से किशोर लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर बढ़ सकती है। हालांकि, दिसंबर 2025 में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया था कि देश के 94% स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय हैं, लेकिन उनके रखरखाव और सफाई को लेकर अब भी चिंताएं बनी हुई हैं।