Maharashtra में RTI नियमों को लेकर विवाद, एक्टिविस्ट्स ने सरकार को भेजा लीगल नोटिस, अन्ना हजारे करेंगे भूख हड़ताल

Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए गए नए राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) रूल्स 2026 को लेकर राज्य में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पारदर्शिता के लिए लड़ने वाले कई बड़े एक्टिविस्ट्स और पूर्व सूचना अधिकारियों ने सरकार को लीगल

Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए गए नए राइट टू इंफॉर्मेशन (RTI) रूल्स 2026 को लेकर राज्य में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पारदर्शिता के लिए लड़ने वाले कई बड़े एक्टिविस्ट्स और पूर्व सूचना अधिकारियों ने सरकार को लीगल नोटिस भेजा है। उन्होंने मांग की है कि इन नए नियमों को 15 दिनों के भीतर पूरी तरह वापस लिया जाए, वरना मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में ले जाया जाएगा।

ये नए नियम 5 जुलाई 2026 से लागू होने वाले हैं। एक्टिविस्ट्स का कहना है कि इन बदलावों से आम जनता के लिए जानकारी पाना अब और भी मुश्किल और महंगा हो जाएगा। इस मामले में दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन संशोधनों को वापस नहीं लिया, तो वह 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।

विवाद की मुख्य वजह नए नियमों में किए गए कई कड़े प्रावधान हैं। एक्टिविस्ट्स का मानना है कि सरकार ने RTI एक्ट 2005 के तहत मिलने वाले अधिकारों को कम कर दिया है। मुख्य विवादित बिंदु नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:

नियम पहले क्या था / क्या प्रावधान है अब क्या बदलाव हुआ है
आवेदन शुल्क 10 रुपये बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया
अपील शुल्क नि:शुल्क / कम पहली अपील के लिए 50 और दूसरी के लिए 100 रुपये
BPL आवेदकों के लिए पूरी तरह मुफ्त जानकारी सिर्फ पहले 50 पेज मुफ्त मिलेंगे
पहचान पत्र जरूरी नहीं था भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए फोटो आईडी अनिवार्य
आवेदन की सीमा कोई सख्त शब्द सीमा नहीं एक आवेदन में एक विषय और अधिकतम 150 शब्द
वकीलों की भूमिका प्रतिनिधित्व कर सकते थे सुनवाई के दौरान वकीलों के प्रतिनिधित्व पर रोक

सूचना अधिकार कार्यकर्ता विजय कुंभार ने इसे नागरिकों के जानने के अधिकार पर बड़ा प्रहार बताया है। वहीं, सजग नागरिक मंच के विवेक वेलणकर ने कहा कि फीस बढ़ाने का कोई ठोस कारण नहीं दिया गया है, जिससे आम जनता प्रभावित होगी। इस लीगल नोटिस में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी और वकील प्रहलाद कचारे समेत कई नाम शामिल हैं।

दूसरी तरफ, महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और RTI आवेदनों की प्रक्रिया को आसान बनाना है। सरकार का तर्क है कि ये कदम RTI के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाए गए हैं। हालांकि, 19 जून को सरकार ने एक विवादित नियम हटा दिया था, जिसमें आवेदक को जानकारी मांगने का कारण बताना पड़ता था, लेकिन बाकी नियम अब भी लागू हैं।