Maharashtra: पालघर जिले के दहानु से समुद्र में छोड़ी गई एक ओलिव रिडले कछुआ, जिसका नाम धवल लक्ष्मी रखा गया था, लगभग छह महीने बाद वापस भारतीय तट पर लौट आई है। इस कछुए ने अरब सागर में 3,500 किलोमीटर से ज्यादा की एक दुर्लभ ग
Maharashtra: पालघर जिले के दहानु से समुद्र में छोड़ी गई एक ओलिव रिडले कछुआ, जिसका नाम धवल लक्ष्मी रखा गया था, लगभग छह महीने बाद वापस भारतीय तट पर लौट आई है। इस कछुए ने अरब सागर में 3,500 किलोमीटर से ज्यादा की एक दुर्लभ गहरी समुद्री यात्रा पूरी की है। यह पूरी यात्रा सैटेलाइट ट्रैकर के जरिए ट्रैक की गई, जिससे वैज्ञानिकों को इन कछुओं के आने-जाने के रास्तों की नई जानकारी मिली है।
धवल लक्ष्मी का रेस्क्यू और इलाज कैसे हुआ?
अगस्त 2025 में दहानु के ढकाटी बीच पर स्थानीय मछुआरों ने इस कछुए को मछली पकड़ने के जाल में फंसा हुआ और घायल पाया था। मछुआरों ने तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों को दी, जिसके बाद इसे दहानु टर्टल रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया। यहाँ तीन महीने तक इसका इलाज और देखभाल की गई। पूरी तरह ठीक होने के बाद, 20 नवंबर 2025 को इसकी पीठ पर एक सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर इसे वापस अरब सागर में छोड़ दिया गया था।
इस लंबी यात्रा में कछुआ कहाँ-कहाँ गई?
महाराष्ट्र से छोड़े गए आठ कछुओं में से सिर्फ धवल लक्ष्मी ही ऐसी थी जिसने गहरे समुद्र का रास्ता चुना। फरवरी 2026 में इसे ओमान के तट से करीब 500 किलोमीटर दूर देखा गया, जहाँ इसने 250 मीटर की गहराई तक गोता लगाया। अप्रैल 2026 के अंत में यह ओमान के पास से मुड़कर रत्नागिरी से करीब 800 किलोमीटर पश्चिम में देखी गई। अंत में 7 से 9 मई 2026 के बीच यह वापस भारतीय पानी में दाखिल हुई।
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने क्या कहा?
Wildlife Institute of India (WII) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुरेश कुमार ने इस यात्रा को पुनर्वास प्रयासों की एक बड़ी सफलता बताया है। इससे यह बात सामने आई कि घायल कछुओं का इलाज कर उन्हें छोड़ने के बाद वे समुद्र में जीवित रह सकते हैं और खुद को ढाल सकते हैं। Mangrove Foundation के डिप्टी डायरेक्टर मानस मंजरेकर ने भी इस सफलता की पुष्टि की। यह डेटा भविष्य में मछली पकड़ने की नीतियों में बदलाव लाने में मदद करेगा ताकि अनजाने में कछुओं को चोट न पहुंचे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
धवल लक्ष्मी कछुए का नाम किसके नाम पर रखा गया था?
इस कछुए का नाम स्वर्गीय वन्यजीव कार्यकर्ता धवल कंसारा के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने दहानु में रेस्क्यू सेंटर बनाने में मदद की थी।
इस प्रोजेक्ट में किन संस्थाओं ने हिस्सा लिया?
इस प्रोजेक्ट में Wildlife Institute of India (WII), महाराष्ट्र का Mangrove Foundation और दहानु फॉरेस्ट डिवीजन शामिल थे।