Maharashtra: राज्य के इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए बुरी खबर है। NEET पेपर लीक विवाद की वजह से अब इन कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया और नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में देरी होगी। उच्च एवं
Maharashtra: राज्य के इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए बुरी खबर है। NEET पेपर लीक विवाद की वजह से अब इन कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया और नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में देरी होगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस बात की पुष्टि की है कि कई सीटों का एडमिशन NEET के नतीजों पर निर्भर है।
एडमिशन में देरी क्यों हो रही है?
मंत्री चंद्रकांत पाटिल के अनुसार, इंजीनियरिंग की 9 ब्रांच और फार्मेसी की 15% ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए NEET स्कोर जरूरी होता है। जब तक NEET की दोबारा परीक्षा नहीं हो जाती और नए नतीजे नहीं आ जाते, तब तक इन सीटों के लिए एडमिशन शुरू नहीं किए जा सकते। NTA ने दोबारा परीक्षा 21 जून 2026 को तय की है, जिससे नतीजे जुलाई के मध्य तक आने की उम्मीद है। इस वजह से CET Cell का जून के अंत तक CAP राउंड शुरू करने का प्लान अब बदल गया है।
कॉलेज फीस के नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?
सरकार ने अब कॉलेजों के लिए फीस वसूलने के नियम बदल दिए हैं। अब कॉलेज डेवलपमेंट फीस या लैब फीस जैसे अलग-अलग नाम पर पैसे नहीं ले सकेंगे। सभी जरूरी चार्ज को मिलाकर एक ही ‘फीस’ कैटेगरी बनाई जाएगी, जिसे Fee Regulatory Authority कंट्रोल करेगी। कॉलेजों को अब अपनी पूरी फीस लिस्ट नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी ताकि छात्रों से कोई छुपा हुआ चार्ज न लिया जा सके।
लड़कियों के लिए सरकारी मदद का क्या प्रावधान है?
नई फीस व्यवस्था का बड़ा फायदा उन छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है। ऐसी लड़कियों को सरकार की 100% फीस माफी योजना का पूरा लाभ मिलेगा और कॉलेज उनसे कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूल पाएंगे। हालांकि, हॉस्टल, ट्रांसपोर्ट और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं के लिए अलग से पैसे देने होंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
NEET की दोबारा परीक्षा कब होगी और इसका असर क्या होगा?
NTA ने दोबारा परीक्षा 21 जून 2026 को तय की है। इसके कारण महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों के एडमिशन जुलाई के मध्य या उसके बाद ही शुरू हो पाएंगे।
कॉलेज फीस के नए नियम क्या हैं?
अब कॉलेज अलग-अलग हेड के नाम पर चार्ज नहीं ले सकेंगे। सभी अनिवार्य शुल्क एक ही रेगुलेटेड फीस में मर्ज होंगे और कॉलेजों को पूरी फीस लिस्ट नोटिस बोर्ड पर दिखानी होगी।