Maharashtra में मानसून फिशिंग बैन को लेकर विवाद, 1 अगस्त से ही हटा ली गई रोक, मछुआरों में नाराजगी

Maharashtra: राज्य के मछुआरों में सरकार के एक फैसले को लेकर काफी गुस्सा है। सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर लगी रोक को 15 अगस्त के बजाय 1 अगस्त से ही खत्म करने का फैसला किया है। इस बदलाव के बाद मछुआरा संगठनों ने

Maharashtra: राज्य के मछुआरों में सरकार के एक फैसले को लेकर काफी गुस्सा है। सरकार ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने पर लगी रोक को 15 अगस्त के बजाय 1 अगस्त से ही खत्म करने का फैसला किया है। इस बदलाव के बाद मछुआरा संगठनों ने अपनी नाराजगी जताई है और इसे छोटे मछुआरों के साथ धोखा बताया है।

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने पहले यह ऐलान किया था कि मछली पकड़ने पर लगी रोक 15 अगस्त तक रहेगी। इसका मकसद समुद्री जीवों के प्रजनन में मदद करना और मछली की संख्या को बढ़ाना था। राज्य के मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने 29 जून को इस विस्तार की घोषणा की थी, ताकि महाराष्ट्र की नीति पड़ोसी राज्य गुजरात के समान रहे।

अब सरकार ने इस तारीख को बदलकर 1 अगस्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला केंद्र सरकार की उस पॉलिसी के कारण लिया गया है, जिसमें 12 नॉटिकल मील से आगे Exclusive Economic Zone (EEZ) में फिशिंग बैन 31 जुलाई को खत्म हो रहा है। मछुआरों का कहना है कि सरकार ने इस बदलाव की जानकारी उन्हें सही समय पर नहीं दी।

अखिल महाराष्ट्र मछिमार कृति समिति के अध्यक्ष देवेंद्र तंदेल के नेतृत्व में मछुआरों ने अपनी चिंताएं रखी हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से बड़े कमर्शियल ऑपरेटरों और अमीर नाव मालिकों को फायदा होगा, क्योंकि उनके पास बेहतर उपकरण हैं। वहीं, छोटे और पारंपरिक मछुआरे 15 अगस्त की तारीख के भरोसे अपनी नावों, इंजन और जालों की मरम्मत कर रहे थे, जिससे वे अब अचानक शुरू होने वाली फिशिंग के लिए तैयार नहीं हैं।

मछुआरों का यह भी तर्क है कि अगस्त की शुरुआत में समुद्र में मौसम खराब रहता है, जिससे सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। गुरुवार शाम को नाराज मछुआरा संगठनों ने मंत्री नितेश राणे के साथ बैठक की ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। गौरतलब है कि जून में सरकार ने बैन की अवधि बढ़ने पर प्रभावित मछुआरों को 50,000 रुपये तक की आर्थिक मदद देने पर भी विचार किया था।