Maharashtra में शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा मिलना होगा मुश्किल, सरकार लागू करेगी कड़े नियम

Maharashtra: राज्य में अब शिक्षण संस्थानों के लिए अल्पसंख्यक दर्जा (Minority Status) पाना पहले के मुकाबले कठिन होगा। सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नए और सख्त नियम लागू करने जा रही है। इसके लिए एक हाई-लेवल क

Maharashtra: राज्य में अब शिक्षण संस्थानों के लिए अल्पसंख्यक दर्जा (Minority Status) पाना पहले के मुकाबले कठिन होगा। सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नए और सख्त नियम लागू करने जा रही है। इसके लिए एक हाई-लेवल कमेटी ने अपनी सिफारिशें सौंपी हैं और अगस्त के अंत तक नया SOP (Standard Operating Procedure) जारी होने की उम्मीद है।

यह पूरा मामला फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब पूर्व डिप्टी सीएम Ajit Pawar के निधन के तुरंत बाद 28 से 30 जनवरी के बीच 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया था। इस विवाद के बाद डिप्टी सीएम Sunetra Pawar ने जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 12 अप्रैल 2026 को IAS अधिकारी B Venugopal Reddy की अगुवाई में जांच शुरू हुई और अल्पसंख्यक दर्जा देने की प्रक्रिया को रोक दिया गया।

सरकार ने अब इस प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियों को रोकने के लिए कई बदलाव किए हैं। अब अल्पसंख्यक दर्जे के लिए आने वाले आवेदनों की जांच एक मल्टी-डिपार्टमेंट एक्सपर्ट पैनल करेगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक सीनियर IAS ऑफिसर, मुख्य रूप से विभाग के सचिव करेंगे। साथ ही, यह भी तय किया गया है कि दर्जा मिलने के बाद भी समय-समय पर संस्थानों की समीक्षा (Review) की जाएगी, ताकि यह पता रहे कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल मैनेजमेंट बदलने से किसी नॉन-माइनॉरिटी स्कूल को अल्पसंख्यक दर्जा नहीं मिलेगा। इसके अलावा, अल्पसंख्यक विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य व्यक्तिगत अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी नहीं करता है और स्कूल एडमिशन के लिए छात्रों से इसकी मांग नहीं कर सकते।