Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार अब ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य करने जा रही है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक, 1 मई 2026 से यह नियम लागू होगा। जो ड्राइवर मराठी प
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार अब ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य करने जा रही है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक, 1 मई 2026 से यह नियम लागू होगा। जो ड्राइवर मराठी पढ़, लिख और समझ नहीं पाएंगे, उनके परमिट या लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।
क्या है सरकार का नया नियम और वजह?
सरकार का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि 2019 से मौजूद प्रावधान को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। Transport Department राज्य के 59 क्षेत्रीय कार्यालयों में वेरिफिकेशन अभियान चलाएगा। सरकार के मुताबिक, मुंबई, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों से शिकायतें मिली थीं कि ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाते, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है और वे सड़क संकेतों को नहीं समझ पाते।
किन कानूनी अड़चनों का सामना कर सकती है सरकार?
इस फैसले के बाद कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है क्योंकि Bombay High Court ने 2016 और 2017 में इसी तरह के एक नियम को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि ऑटो-रिक्शा ‘मोटर कैब’ की श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन पर मराठी भाषा की अनिवार्यता थोपना कानूनी रूप से सही नहीं है। अब ड्राइवर यूनियन भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और इसे अपने काम करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बता रहे हैं।
विभिन्न पार्टियों और यूनियनों की क्या प्रतिक्रिया है?
- ड्राइवर यूनियन: उनका कहना है कि सिर्फ बुनियादी जानकारी काफी होनी चाहिए, औपचारिक टेस्ट नहीं। उन्हें डर है कि इससे रिश्वतखोरी बढ़ेगी।
- कांग्रेस: प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस कदम को बहुत ज्यादा सख्त बताया है।
- NCP (शरद पवार गुट): उन्होंने ड्राइवरों को तैयारी के लिए 6 महीने का समय देने की मांग की है।
- शिवसेना: प्रवक्ता अरुण सावंत ने चेतावनी दी है कि नियम न मानने वालों को अंजाम भुगतना पड़ेगा।
- समाजवादी पार्टी: अबू आज़मी ने आरोप लगाया है कि इस नियम का मकसद उत्तर भारतीय ड्राइवरों को निशाना बनाना है।