Maharashtra में मराठा आरक्षण मामला फिर से शुरू हो सकता है, जज की नई तैनाती से बढ़ी मुश्किल
Maharashtra: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर शून्य पर आ सकती है। बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस रवींद्र वी घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सि
Maharashtra: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर शून्य पर आ सकती है। बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस रवींद्र वी घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है। अगर केंद्र सरकार इस नियुक्ति को मंजूरी दे देती है, तो इस केस की पूरी सुनवाई नए सिरे से शुरू करनी पड़ सकती है।
इस मामले में अब तक करीब 20 सुनवाई हो चुकी हैं और याचिकाकर्ताओं की दलीलें पूरी हो चुकी थीं। राज्य सरकार भी अपनी बात रखने के करीब थी, जिससे लग रहा था कि जल्द ही फैसला आ जाएगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 को जस्टिस घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट का 45वां मुख्य न्यायाधीश बनाने का सुझाव दिया, जिसका प्रस्ताव 9 अगस्त को प्रकाशित हुआ।
8 अगस्त 2026 को कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे के अंदर एक अलग उप-श्रेणी में रखा जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा आखिरी नहीं है, जैसा कि EWS आरक्षण के मामले में देखा गया।
इस बीच मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने 9 अगस्त को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की आलोचना की। उन्होंने कुनबी जाति प्रमाण पत्रों को अमान्य किए जाने के मुद्दे पर नाराजगी जताई। फिलहाल इस केस की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होनी है। अगर तब तक जस्टिस घुगे की नई नियुक्ति हो गई, तो बॉम्बे हाई कोर्ट को एक नई बेंच बनानी होगी और केस की शुरुआत फिर से हो सकती है।