Maharashtra Legislative Council में राजनीतिक परिवारों का कब्जा, एक तिहाई से ज्यादा सदस्य हैं बड़े नेताओं के वारिस
Maharashtra: महाराष्ट्र की ऊपरी सदन यानी Legislative Council (MLC) में राजनीतिक परिवारों का दबदबा बना हुआ है। एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल की कुल सीटों में से एक तिहाई से ज्यादा सदस्य ऐसे हैं जो बड़े राजनीतिक घरा
Maharashtra: महाराष्ट्र की ऊपरी सदन यानी Legislative Council (MLC) में राजनीतिक परिवारों का दबदबा बना हुआ है। एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल की कुल सीटों में से एक तिहाई से ज्यादा सदस्य ऐसे हैं जो बड़े राजनीतिक घरानों या प्रभावशाली सहकारी और शिक्षा संस्थाओं के वारिस हैं। यह स्थिति बताती है कि राज्य की राजनीति में आज भी पारिवारिक प्रभाव काफी मजबूत है।
Indian Express की 26 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल की 78 sanctioned सीटों में से वर्तमान में 73 सीटें भरी हुई हैं। इनमें से 24 सदस्य ऐसे हैं जिनके पारिवारिक संबंध वर्तमान या पूर्व के प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं से हैं। इसका मतलब है कि सदन के 33% से ज्यादा हिस्से पर राजनीतिक वंशवाद का कब्जा है। यह ट्रेंड सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में देखा गया है, जिसमें BJP के 9, NCP के 5, कांग्रेस के 5, NCP (SP) का 1 और शिवसेना व उसके सहयोगी गुटों के 4 सदस्य राजनीतिक परिवारों से आते हैं।
इस लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं जैसे सुनील तटकरे के बेटे अनिकेत तटकरे, पूर्व सांसद संजय काकड़े के बेटे विक्रम काकड़े, और प्रसाद तनपुरे के बेटे प्राजक्त तनपुरे। इसके अलावा दिवंगत बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी, सतीश चतुर्वेदी के बेटे दुष्यंत चतुर्वेदी, दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकाजा मुंडे, और छगन भुजबल के बेटे पंकज भुजबल भी सदन के सदस्य हैं। शिक्षा क्षेत्र के बड़े नाम डॉ डी वाई पाटिल के बेटे सतेज पाटिल और सहकारी क्षेत्र के नेता बिपिनदाडा कोल्हे के बेटे विवेक कोल्हे भी इसी सूची में हैं।
राजनीतिक जानकार हेमंत देसाई का कहना है कि महाराष्ट्र की पूरी राजनीति प्रभावशाली परिवारों के नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी बताया कि यह काउंसिल अब उन नेताओं के लिए एक ‘पुनर्वास प्लेटफॉर्म’ (rehabilitation platform) बन गई है जो सीधे चुनाव हार जाते हैं लेकिन पार्टी के लिए अब भी जरूरी होते हैं। हाल ही में 22 जून 2026 को हुए चुनावों और उससे पहले की नियुक्तियों ने इस पैटर्न को और मजबूत किया है। वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे डॉ श्रीकांत शिंदे की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं बढ़ी हैं, जिन्होंने हाल ही में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए छह सांसदों को शिंदे सेना में लाने में मदद की थी।