Maharashtra में HDI रैंकिंग में चौथा स्थान, लेकिन बुजुर्गों की सेहत के मामले में राज्य सबसे पीछे

Maharashtra: महाराष्ट्र जीवन प्रत्याशा और खरीदने की क्षमता के मामले में देश के प्रगतिशील राज्यों में गिना जाता है, लेकिन यहां के बुजुर्गों की सेहत की स्थिति चिंताजनक है। International Institute for Population Sciences (I

Maharashtra: महाराष्ट्र जीवन प्रत्याशा और खरीदने की क्षमता के मामले में देश के प्रगतिशील राज्यों में गिना जाता है, लेकिन यहां के बुजुर्गों की सेहत की स्थिति चिंताजनक है। International Institute for Population Sciences (IIPS), Deonar की एक नई स्टडी में सामने आया है कि महाराष्ट्र के बुजुर्ग अपने जीवन के आखिरी साल अच्छी सेहत और खुशी के साथ नहीं बिता पा रहे हैं।

यह रिसर्च ‘Social Indicators Research’ में प्रकाशित हुई है। स्टडी के लेखक प्रो. डॉ. श्रीनिवास गोली ने बताया कि यह हैरान करने वाला है कि महाराष्ट्र Human Development Index (HDI) में चौथे नंबर पर है, लेकिन ‘Years of Good Life’ (YoGL) के मामले में 21 राज्यों की लिस्ट में सबसे आखिरी यानी 21वें स्थान पर है।

रिसर्च में ‘Years of Good Life’ (YoGL) को मापने के लिए चार शर्तें रखी गई थीं। इसमें व्यक्ति का गरीबी रेखा से ऊपर होना, शरीर में कोई बड़ी कमी न होना, मानसिक रूप से स्वस्थ होना और जीवन से संतुष्ट होना शामिल है। इस डेटा के लिए Longitudinal Ageing Study in India और Sample Registration System की मदद ली गई। इस स्टडी में University of Vienna और Princeton University के शोधकर्ता भी शामिल थे।

नेशनल लेवल पर देखें तो 60 साल के पुरुष को अपनी बची हुई 17.5 साल की जिंदगी में से करीब 8.2 साल अच्छी सेहत में बिताने की उम्मीद होती है, जबकि महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 19 साल में से सिर्फ 5.7 साल है। शहरी इलाकों में रहने वाले लोग ग्रामीण लोगों के मुकाबले ज्यादा ‘अच्छे साल’ जीते हैं।

श्रेणी/राज्य अच्छे साल (Good Years) विशेष विवरण
पंजाब (पुरुष) 12.9 साल YoGL रैंकिंग में टॉप पर
केरल (ग्रामीण महिला) 10.1 साल ग्रामीण महिलाओं के लिए सबसे बेहतर
भारत (शहरी निवासी) 9.2 साल ग्रामीणों से बेहतर स्थिति
भारत (ग्रामीण निवासी) 6.1 साल राष्ट्रीय औसत
भारत (ग्रामीण महिला) 4.6 साल सबसे अधिक संवेदनशील समूह
महाराष्ट्र (ग्रामीण महिला) 2.7 साल सभी राज्यों में सबसे कम

महाराष्ट्र की ग्रामीण महिलाओं की स्थिति सबसे खराब पाई गई है। यहां 60 साल की ग्रामीण महिला अपनी बची हुई 18.5 साल की जिंदगी में से केवल 2.7 साल ही अच्छी सेहत और संतुष्टि के साथ बिता पाती है। इसका मतलब है कि महाराष्ट्र में महिलाओं की बची हुई जिंदगी का केवल 21 प्रतिशत हिस्सा ही ‘अच्छा’ होता है।