Maharashtra: राज्य सरकार मैंग्रोव के जंगलों को बचाने के लिए एक नई ‘Green TDR’ पॉलिसी लाने जा रही है। Deputy CM Eknath Shinde ने ठाणे में एक प्रॉपर्टी एग्जीबिशन के दौरान इस योजना का ऐलान किया। इस पॉलिसी का मकस
Maharashtra: राज्य सरकार मैंग्रोव के जंगलों को बचाने के लिए एक नई ‘Green TDR’ पॉलिसी लाने जा रही है। Deputy CM Eknath Shinde ने ठाणे में एक प्रॉपर्टी एग्जीबिशन के दौरान इस योजना का ऐलान किया। इस पॉलिसी का मकसद पर्यावरण को बचाना और अवैध निर्माण को रोकना है ताकि जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटा जा सके।
क्या है Green TDR पॉलिसी और यह कैसे काम करेगी?
इस नई पॉलिसी के तहत अगर कोई जमीन मालिक या डेवलपर अपनी मैंग्रोव वाली जमीन स्वेच्छा से Forest Department को सौंपता है, तो उसे बदले में TDR (Transfer of Development Rights) मिलेगा। इस TDR का इस्तेमाल वे किसी दूसरी जगह पर अपने कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्राइवेट जमीन पर मौजूद मैंग्रोव को बचाने के लिए लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।
मैंग्रोव संरक्षण के लिए सरकार ने अब तक क्या किया?
महाराष्ट्र सरकार पिछले कुछ समय से मैंग्रोव को बचाने के लिए कई कदम उठा रही है। इससे जुड़ी कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- जनवरी 2026 में 955 हेक्टेयर मैंग्रोव क्षेत्र को प्रोटेक्टेड साइट घोषित किया गया।
- अक्टूबर 2025 में Bombay High Court ने सात तटीय जिलों के कलेक्टरों को जमीन मैंग्रोव सेल को सौंपने का आदेश दिया था।
- जुलाई 2022 में सभी मैंग्रोव क्षेत्रों को ‘Reserved Forest’ कैटेगरी में लाने का फैसला लिया गया था।
- साल 2012 से 2022 के बीच सात तटीय जिलों में मैंग्रोव कवर में 72% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आम लोगों और बिल्डर्स पर क्या होगा असर?
यह पॉलिसी खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जिनके पास ऐसी जमीन है जहाँ मैंग्रोव उगे हुए हैं। अब उन्हें जमीन बचाने के लिए नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा, बल्कि वे TDR के जरिए अपना विकास कार्य दूसरी जगह कर पाएंगे। इससे CRZ (Coastal Regulation Zone) इलाकों में होने वाली अवैध गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी। हालांकि, इस पॉलिसी की विस्तृत गाइडलाइन्स अभी आनी बाकी हैं।