Maharashtra: राज्य सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में मनमाने ढंग से बढ़ाई जाने वाली फीस को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने लंबे समय से बंद पड़ी फीस रिविजन कमेटी को फिर से सक्रिय कर दिया है। 14 अप्रैल 2026 से यह व्
Maharashtra: राज्य सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में मनमाने ढंग से बढ़ाई जाने वाली फीस को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने लंबे समय से बंद पड़ी फीस रिविजन कमेटी को फिर से सक्रिय कर दिया है। 14 अप्रैल 2026 से यह व्यवस्था लागू हो गई है, ताकि स्कूल अपनी मर्जी से फीस न बढ़ा सकें और अभिभावकों को राहत मिल सके।
फीस बढ़ाने के क्या हैं नियम और शर्तें?
Maharashtra Educational Institutions (Regulation of Fee) Act, 2011 के तहत अब स्कूलों को फीस बढ़ाते समय नियमों का पालन करना होगा। जिन स्कूलों ने लंबी अवधि का फीस ढांचा तय नहीं किया है, वे पिछले साल की तुलना में अधिकतम 15% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। आमतौर पर फीस में बदलाव हर दो साल में एक बार ही किया जा सकता है। अगर कोई स्कूल इससे ज्यादा फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे 76% अभिभावकों की सहमति लेनी होगी या फिर ठोस कारण बताने होंगे।
शिकायत कैसे करें और कौन करेगा सुनवाई?
अब अभिभावकों के लिए शिकायत करना आसान हो गया है। सरकार ने राज्य स्तर पर एक रिविजन कमेटी और अलग-अलग डिवीजनों में रेगुलेटरी कमेटियां बनाई हैं। रिटायर्ड बॉम्बे हाई कोर्ट जज M G Gaikwad राज्य स्तर की कमेटी के प्रमुख होंगे। इसके अलावा मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर के लिए अलग-अलग कमेटियां बनाई गई हैं, जिनके अध्यक्ष रिटायर्ड जिला जज होंगे।
| क्षेत्र (Division) |
अध्यक्ष (Chairperson) |
| मुंबई |
M S Gupta |
| पुणे |
S S Gulhane |
| नागपुर |
O P Jaiswal |
| छत्रपति संभाजीनगर |
K R Devsarkar |
अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा?
शिक्षा मंत्री Dadaji Bhuse के अनुसार, अब किसी एक अभिभावक को भी शिकायत करने का अधिकार होगा, पहले इसके लिए 25% अभिभावकों के हस्ताक्षर जरूरी थे। सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड पर फीस कमेटी और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, सरकार अब गुजरात की तर्ज पर इलाके के खर्च और मांग के हिसाब से फीस की एक सीमा (Slab) तय करने पर विचार कर रही है।