Maharashtra: राज्य सरकार ने रेलवे की जमीनों के रिकॉर्ड को अपडेट करने का बड़ा फैसला लिया है। राजस्व विभाग ने इसके लिए एक सरकारी आदेश (GR) जारी किया है, जिसके तहत अब हर गांव के नक्शे और रिकॉर्ड में रेलवे की जमीन के लिए अलग
Maharashtra: राज्य सरकार ने रेलवे की जमीनों के रिकॉर्ड को अपडेट करने का बड़ा फैसला लिया है। राजस्व विभाग ने इसके लिए एक सरकारी आदेश (GR) जारी किया है, जिसके तहत अब हर गांव के नक्शे और रिकॉर्ड में रेलवे की जमीन के लिए अलग सर्वे नंबर या ग्रुप नंबर दिया जाएगा। इस कदम से जमीन के मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी।
रेलवे जमीन के रिकॉर्ड में क्या बदलाव होंगे?
राजस्व और वन विभाग द्वारा जारी GR नंबर Sankirna-2025/P.R.236/Bhumpan/E-1346038 के अनुसार, अब रेलवे की सभी जमीनों को आधिकारिक तौर पर ‘भारत सरकार-रेलवे विभाग’ के नाम पर दर्ज किया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बदलाव किए जाएंगे:
- गांव के नक्शों और 7/12 एक्सट्रैक्ट (उतारा) में अलग सर्वे नंबर या गट नंबर दिया जाएगा।
- प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन कार्ड और सिटी सर्वे नंबर को अपडेट किया जाएगा।
- रेलवे विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई निजी जमीनों का रिकॉर्ड भी दुरुस्त किया जाएगा।
- पुराने सर्वे और पुनरीक्षण योजनाओं में छूटे हुए विवरणों को जोड़ा जाएगा।
इस फैसले की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार ने पाया कि कई जगहों पर रेलवे की जमीन को केवल ‘रेलवे प्रॉपर्टी’ लिखा गया था, लेकिन रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (7/12) में उसका स्पष्ट मालिकाना हक दर्ज नहीं था। कई बार रेलवे ट्रैक को सिर्फ ‘सड़क और ट्रैक’ के रूप में दिखाया गया था। इस कमी की वजह से रेलवे की जमीनों पर अवैध कब्जे, मालिकाना हक के झगड़े और कोर्ट केस बढ़ रहे थे। अब नए रिकॉर्ड बनने से इन कानूनी उलझनों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेलवे जमीन के रिकॉर्ड में अब किसका नाम दर्ज होगा?
नए सरकारी आदेश के बाद, अब इन जमीनों के 7/12 उतारा और अन्य दस्तावेजों में मालिकाना हक ‘भारत सरकार-रेलवे विभाग’ (Government of India-Railway Department) के नाम पर दर्ज किया जाएगा।
इस नए सर्वे से आम लोगों और प्रशासन को क्या फायदा होगा?
इससे रेलवे की जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों पर रोक लगेगी और जमीन के मालिकाना हक को लेकर चलने वाले लंबे कानूनी विवाद और मुकदमेबाजी खत्म होगी।