Maharashtra: राज्य स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अस्पतालों में PCOS और PMOS जैसी समस्याओं के लिए खास क्लिनिक शुरू किए जा रहे हैं। इसका मकसद महिलाओं में इन ब
Maharashtra: राज्य स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अस्पतालों में PCOS और PMOS जैसी समस्याओं के लिए खास क्लिनिक शुरू किए जा रहे हैं। इसका मकसद महिलाओं में इन बीमारियों की जल्द पहचान करना, सही इलाज देना और उन्हें सही सलाह देना है।
इन क्लिनिकों में क्या सुविधा मिलेगी और यह कैसे काम करेंगे?
राज्य के जिला अस्पतालों, सामान्य अस्पतालों, महिला अस्पतालों और नगर निगम के अस्पतालों में ये विशेष ओपीडी (OPD) शुरू की गई हैं। ये क्लिनिक हर बुधवार को चलेंगे और साथ ही मेनोपॉज ओपीडी भी उपलब्ध रहेंगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि यहाँ आने वाली महिलाओं की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
PCOS अब PMOS क्यों कहलाएगा?
मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर PCOS का नाम बदलकर अब PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) कर दिया गया है। यह बदलाव 12 मई 2026 को हुआ। जानकारों का कहना है कि यह बीमारी सिर्फ ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्या है। नाम बदलने से लोगों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ेगी और इलाज का तरीका और बेहतर होगा।
सरकार ने इसे कैसे लागू किया है?
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जिला सिविल सर्जनों और स्वास्थ्य अधिकारियों को इन क्लिनिकों को शुरू करने के निर्देश दिए हैं। राज्य परिवार कल्याण ब्यूरो के संयुक्त निदेशक डॉ. संदीप सांगले और राज्य मंत्री मेघना बोरडिकर ने बताया कि यह पहल महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। इस पूरे प्रोग्राम की निगरानी मैटरनल हेल्थ सेल द्वारा की जाएगी और सहायक निदेशक नोडल ऑफिसर के तौर पर काम करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
PCOS/PMOS क्लिनिक कब और कहाँ उपलब्ध होंगे?
ये क्लिनिक महाराष्ट्र के जिला, सामान्य, महिला और नगर निगम अस्पतालों में हर बुधवार को उपलब्ध होंगे। इनकी शुरुआत 6 मई 2026 से हो चुकी है।
क्या इन क्लिनिकों में इलाज के लिए पैसे देने होंगे?
नहीं, इन क्लिनिकों में महिलाओं की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। इसका पूरा खर्च महाराष्ट्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।