Maharashtra: मुंबई में Circoloco इवेंट के रद्द होने के बाद अब राज्य सरकार लाइव कॉन्सर्ट और बड़े इवेंट्स के लिए नए नियम यानी SOP तैयार कर रही है। सरकार का मकसद एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो इंडस्ट्री के लिए आसान हो और इवेंट ऑ
Maharashtra: मुंबई में Circoloco इवेंट के रद्द होने के बाद अब राज्य सरकार लाइव कॉन्सर्ट और बड़े इवेंट्स के लिए नए नियम यानी SOP तैयार कर रही है। सरकार का मकसद एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो इंडस्ट्री के लिए आसान हो और इवेंट ऑर्गनाइजर्स को परमिशन मिलने में परेशानी न हो। इसके लिए एक खास एक्शन प्लान बनाया जा रहा है ताकि महाराष्ट्र को लाइव एंटरटेनमेंट का बड़ा हब बनाया जा सके।
सिंगल विंडो सिस्टम से क्या होगा फायदा?
अभी किसी भी बड़े इवेंट के लिए ऑर्गनाइजर्स को पुलिस, फायर ब्रिगेड, बिजली विभाग और नगर निगम जैसी 10 से 15 अलग-अलग जगहों से मंजूरी लेनी पड़ती है। अब सरकार सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम शुरू करेगी, जिससे एक ही जगह से सारी परमिशन मिल सकेंगी। इसके लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो सके।
SOP बनाने के लिए 25 सदस्यों की टीम गठित
इस नए सिस्टम और SOP को तैयार करने के लिए सरकार ने 25 सदस्यों का एक पैनल बनाया है। इसमें पुलिस, BMC, फायर सर्विस, आईटी विभाग और इवेंट ऑर्गनाइजर्स के प्रतिनिधि शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी DGIPR को सौंपी गई है। यह कदम केंद्र सरकार के ‘Live Events Development Cell’ (LEDC) के विजन के साथ मेल खाता है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत को लाइव इवेंट्स में ग्लोबल लीडर बनाना है।
Circoloco इवेंट क्यों हुआ था रद्द?
19 अप्रैल 2026 को होने वाला Circoloco मुंबई इवेंट आखिरी समय पर रद्द कर दिया गया था। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इसे मंजूरी नहीं दी थी क्योंकि ऑर्गनाइजर्स ने शो से सिर्फ 10 दिन पहले आवेदन किया था। इससे पहले 11 अप्रैल को 9×9 म्यूजिक कॉन्सर्ट में दो छात्रों की संदिग्ध ओवरडोज से मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लाइव इवेंट्स के लिए नया SOP क्यों लाया जा रहा है?
परमिशन की जटिल प्रक्रिया को आसान बनाने और सुरक्षा नियमों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए यह SOP लाया जा रहा है।
सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम क्या है?
यह एक ऐसा सिस्टम है जहाँ इवेंट ऑर्गनाइजर्स को अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने के बजाय एक ही जगह से सभी जरूरी मंजूरियां मिल जाएंगी।