Maharashtra में PoP मूर्तियों के विसर्जन के लिए नई योजना, सरकार ने Bombay High Court में सौंपी रिपोर्ट
Maharashtra: गणेश उत्सव के दौरान इस्तेमाल होने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों के निपटारे के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक नई योजना तैयार की है। सरकार ने बुधवार को Bombay High Court में एक एक्सपर्ट टेक्निकल पैनल क
Maharashtra: गणेश उत्सव के दौरान इस्तेमाल होने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों के निपटारे के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक नई योजना तैयार की है। सरकार ने बुधवार को Bombay High Court में एक एक्सपर्ट टेक्निकल पैनल की रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में पर्यावरण को बचाने के लिए मूर्तियों के विसर्जन और उनके पुनर्चक्रण (Recycle) के लिए खास सुझाव दिए गए हैं।
एक्सपर्ट पैनल ने सुझाव दिया है कि विसर्जन के लिए दो अलग-अलग आर्टिफिशियल तालाब बनाए जाएं। एक तालाब उन मूर्तियों के लिए होगा जो पर्यावरण के लिए हानिकारक सामग्री जैसे PoP से बनी हैं, और दूसरा तालाब पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों के लिए होगा। पैनल ने बताया कि PoP मूर्तियों को प्राकृतिक तरीके से गलना बहुत मुश्किल है, इसलिए इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट में मूर्तियों को गलाने के लिए केमिकल प्रोसेस पर भी चर्चा हुई, लेकिन इसे महंगा और प्रदूषण फैलाने वाला बताया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमोनियम बाइकार्बोनेट का इस्तेमाल करने पर लागत बहुत बढ़ जाएगी क्योंकि इसमें मूर्ति के वजन के बराबर केमिकल चाहिए होता है, जो कि 10 गुना ज्यादा महंगा पड़ता है। इसकी जगह पैनल ने ‘कैलसिनेशन’ (Calcination) प्रक्रिया का सुझाव दिया है। इसमें पुरानी PoP सामग्री को 150 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करके फिर से नया PoP बनाया जा सकता है, जिसका उपयोग नई मूर्तियों, मेडिकल प्लास्टर या ईंट बनाने में किया जा सकेगा।
यह पूरा मामला साल 2024 में एक्टिविस्ट रोहित जोशी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद शुरू हुआ, जिसके बाद अगस्त 2025 में सरकार ने एक वैज्ञानिक समिति बनाई थी। इस समिति का नेतृत्व MPCB के सदस्य-सचिव देवेंद्र सिंह कर रहे हैं। वहीं, BMC ने बताया कि 2025 के गणेश उत्सव के बाद करीब 2,000 से 2,500 टन PoP कचरा जमा हुआ था, जिसे अब रीसायकल करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है।
दूसरी तरफ, Brihanmumbai Sarvajanik Ganeshotsav Samanvay Samiti (BSGSS) ने PoP मूर्तियों पर तुरंत बैन लगाने का विरोध किया है। समिति का कहना है कि बैन लगाने के बजाय 100% कलेक्शन और रीसाइक्लिंग की पॉलिसी बनानी चाहिए और इसके लिए 3 से 5 साल का समय दिया जाना चाहिए। अब Bombay High Court इस पूरे मामले पर दो हफ्ते बाद अंतिम सुनवाई करेगा।