Maharashtra: राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में यह बात मानी है कि उसके पास SSPE नाम की दुर्लभ बीमारी के इलाज के लिए कोई खास योजना नहीं है। यह बीमारी खसरे (Measles) के वायरस में बदलाव आने की वजह से होती है और दिमाग पर अस
Maharashtra: राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में यह बात मानी है कि उसके पास SSPE नाम की दुर्लभ बीमारी के इलाज के लिए कोई खास योजना नहीं है। यह बीमारी खसरे (Measles) के वायरस में बदलाव आने की वजह से होती है और दिमाग पर असर डालती है। कोर्ट में यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए सामने आया है, जिसमें मरीजों के लिए आर्थिक मदद और इलाज की मांग की गई है।
SSPE बीमारी और मरीजों की क्या है स्थिति?
पनवेल के रहने वाले Mahadu Belkar ने इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके 16 साल के बेटे Tanish की 10 मार्च को इस बीमारी की वजह से मौत हो गई। Belkar ने अपनी याचिका में महाराष्ट्र के 62 मरीजों की लिस्ट सौंपी है और मांग की है कि इन परिवारों को नर्सिंग, सही इलाज और पैसों की मदद मिले। वर्तमान में यह बीमारी National Policy for Rare Diseases (NPRD) में शामिल नहीं है, जिस वजह से मरीजों को सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है।
सरकार और कोर्ट में अब तक क्या हुआ?
राज्य सरकार के वकील Onkar Chandurkar ने कोर्ट को बताया कि जुलाई 2025 में सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर SSPE को नेशनल पॉलिसी (NPRD) में शामिल करने की मांग की थी। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील Kaushal Tamhane ने दलील दी कि पॉलिसी न होने की वजह से मरीजों को इलाज से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
मरीजों के सामने आने वाली मुख्य मुश्किलें
| समस्या |
विवरण |
| सरकारी स्कीम |
राज्य सरकार के पास SSPE के लिए कोई अलग योजना नहीं है |
| बीमा कवर |
इंश्योरेंस कंपनियां अस्पताल के खर्च के लिए Mediclaim नहीं दे रही हैं |
| नेशनल पॉलिसी |
NPRD की लिस्ट में यह बीमारी शामिल नहीं है |
| पिछला वादा |
अप्रैल 2025 में स्वास्थ्य मंत्री Prakash Abitkar ने पॉलिसी बनाने का भरोसा दिया था |
इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट में होगी। चीफ जस्टिस Shree Chandrashekhar और जस्टिस Shyam Chandak इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।