Maharashtra में महिला किसानों को मिलेगी कानूनी पहचान, सरकार ने विधानसभा में पेश किया नया बिल
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने खेती-किसानी में जुटी महिलाओं को औपचारिक पहचान दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ पेश किय
Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार ने खेती-किसानी में जुटी महिलाओं को औपचारिक पहचान दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को विधानसभा में ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ पेश किया गया। इस कानून का मुख्य मकसद उन महिलाओं को ‘किसान’ के रूप में मान्यता देना है जो खेती का काम तो करती हैं लेकिन जमीन उनके नाम पर नहीं है।
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने बताया कि राज्य के कृषि कार्यबल में 81 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं हैं, लेकिन जमीन के मालिकाना हक की कमी के कारण वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाती थीं। अब इस नए बिल के जरिए उन्हें पहचान, अधिकार और अवसर मिलेंगे। राज्य के कृषि मंत्री Dattatray Bharane ने सदन में यह बिल पेश किया।
इस बिल के तहत किसान की परिभाषा को काफी बढ़ा दिया गया है। अब महाराष्ट्र की कोई भी महिला जो खेती से जुड़ी है, चाहे वह भूमिहीन हो, पट्टे पर खेती करती हो, खेतिहर मजदूर हो या पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी हो, उसे किसान माना जाएगा। इसमें मधुमक्खी पालन, रेशम उत्पादन, मशरूम की खेती और वनोपज इकट्ठा करने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
महिलाओं को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और बैंक लोन की सुविधा दिलाने के लिए ‘महिला किसान प्रमाण पत्र’ (Woman Farmer Certificates) जारी किए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभा और शहरी क्षेत्रों में नगर पंचायत इन आवेदनों की जांच करेगी। मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी यह सर्टिफिकेट जारी कर देगा।
सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को चलाने के लिए कई इंतजाम किए हैं। महिलाओं की मदद के लिए जिला और तालुका स्तर पर ‘महिला किसान सहायता अधिकारी’ नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही, एक डिजिटल डेटाबेस बनाया जाएगा और एक विशेष ‘महाराष्ट्र राज्य महिला किसान कोष’ की स्थापना की जाएगी, जिसमें सरकारी अनुदान और निजी दान शामिल होगा।
नीति के सही कार्यान्वयन के लिए तीन स्तरों पर ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें एक गवर्निंग काउंसिल, राज्य स्तरीय निगरानी समिति और महिला किसान सशक्तिकरण सेल शामिल होगा। इस कानून के लागू होने से अब 18 वर्ष से ऊपर की सभी पात्र महिलाओं को फसल बीमा, नई तकनीक और बाजार तक आसान पहुंच मिल सकेगी।