Maharashtra: राज्य में आवारा कुत्तों का खतरा तेजी से बढ़ा है। पिछले तीन महीनों में करीब 5 लाख लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं और 19 लोगों की रेबीज की वजह से मौत हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि सड़कों पर खुले कचरे
Maharashtra: राज्य में आवारा कुत्तों का खतरा तेजी से बढ़ा है। पिछले तीन महीनों में करीब 5 लाख लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं और 19 लोगों की रेबीज की वजह से मौत हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि सड़कों पर खुले कचरे की वजह से कुत्तों की संख्या बढ़ी है और ब्रीडिंग सीजन के दौरान उनका व्यवहार और ज्यादा आक्रामक हो गया है।
सरकार और प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने मार्च 2026 में रेबीज को ‘नॉटिफिएबल डिजीज’ घोषित किया है, जिसका मतलब है कि अब हर अस्पताल को रेबीज के संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट विभाग को देनी होगी। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहरी और ग्रामीण निकायों को नसबंदी और टीकाकरण अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटन विभाग ने भी जनवरी 2026 में आदेश जारी किया है कि पर्यटन स्थलों पर आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जाए।
कुत्तों की आबादी कम करने के लिए क्या प्लान है?
उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde ने बताया कि स्थानीय निकायों को Animal Birth Control (ABC) और एंटी-रेबीज टीकाकरण बढ़ाने को कहा गया है। पुणे में एक मल्टीस्पेशलिटी एनिमल हॉस्पिटल चालू हो गया है और गोरेगांव में 80 करोड़ रुपये की लागत से दूसरा अस्पताल बन रहा है। वहीं, पशुपालन विभाग के सचिव Dr. Ramaswami N ने सुझाव दिया है कि नसबंदी के लिए लेप्रोस्कोपिक तरीके अपनाए जाने चाहिए क्योंकि वर्तमान व्यवस्था कई नगर निगमों में बहुत धीमी है।
Thane में क्या खास इंतजाम किए गए हैं?
Thane Municipal Corporation (TMC) ने फरवरी 2026 में ‘Rabies-Free Thane’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत एक महीने में 25,000 से ज्यादा कुत्तों का टीकाकरण किया जा रहा है। Chief Medical Officer Dr. Patil के मुताबिक, जिन कुत्तों को वैक्सीन लग चुकी है, उनके गले में ऑरेंज रिफ्लेक्टर कॉलर पहनाए जा रहे हैं। इससे रात में वाहन चालकों को कुत्ते आसानी से दिखेंगे और एक ही कुत्ते को दोबारा टीका लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
महाराष्ट्र में कुत्तों के काटने के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
डॉक्टरों के अनुसार, सड़कों पर खुले कचरे से कुत्तों को आसानी से खाना मिल रहा है, जिससे उनकी आबादी बढ़ी है। साथ ही ब्रीडिंग साइकिल के दौरान कुत्तों का व्यवहार आक्रामक हो जाता है।
रेबीज को ‘नॉटिफिएबल डिजीज’ बनाने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि अब सभी डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य है कि वे रेबीज के किसी भी संदिग्ध मामले की जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें।