Maharashtra के छोटे शहरों की बदलेगी सूरत, कैबिनेट ने Urban Challenge Fund को दी मंजूरी, बुनियादी सुविधाओं के लिए मिलेगा पैसा
Maharashtra: राज्य सरकार ने छोटे और मध्यम शहरों के विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में Urban Challenge Fund (UCF) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फंड का मुख्य मकसद उन शहरों में नागरिक बुनिया
Maharashtra: राज्य सरकार ने छोटे और मध्यम शहरों के विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में Urban Challenge Fund (UCF) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फंड का मुख्य मकसद उन शहरों में नागरिक बुनियादी ढांचा (civic infrastructure) प्रोजेक्ट्स को पूरा करना है, जिनकी आबादी एक लाख से कम है।
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने इस फंड के लिए सोमवार को सिफारिश की थी, जिसे मंगलवार को आधिकारिक मंजूरी मिल गई। यह स्कीम साल 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और जरूरत पड़ने पर इसे तीन साल और बढ़ाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने भी 15-16 अप्रैल 2026 को इस फंड के लिए नेशनल गाइडलाइंस जारी कर दी थीं।
इस योजना के जरिए नगर निकायों (ULBs) को बाजार से पैसा जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अब शहर सिर्फ सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन और PPP मॉडल के जरिए फंड जुटाएंगे। केंद्र सरकार प्रोजेक्ट की लागत का केवल 25% हिस्सा देगी, जबकि बाकी 50% या उससे ज्यादा पैसा राज्यों और स्थानीय निकायों को बाजार से जुटाना होगा।
| विवरण | राशि/जानकारी |
|---|---|
| महाराष्ट्र के लिए कुल टारगेट फंड | Rs 44,800 करोड़ |
| केंद्र सरकार का योगदान | Rs 11,200 करोड़ |
| राज्य सरकार का योगदान | Rs 11,200 करोड़ |
| बाजार (Bond, Loan, PPP) से जुटाया जाने वाला पैसा | Rs 22,400 करोड़ |
| नेशनल लेवल पर कुल प्रस्तावित फंड | Rs 90,000 करोड़ |
इस फंड का इस्तेमाल डिजिटल गवर्नेंस, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पानी की सप्लाई, साफ-सफाई, पैदल चलने वालों और साइकिल के लिए रास्ते बनाने और मार्केट के नवीनीकरण जैसे 22 मुख्य क्षेत्रों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भरोसा जताया है कि इस पहल से शहरों में सुविधाओं में सुधार होगा और वे विकास के इंजन बनेंगे।
केंद्रीय मंत्री Manohar Lal ने कहा कि इस फंड का लक्ष्य शहरों को ‘बैंकबल एसेट्स’ बनाना है ताकि बेहतर गवर्नेंस और राजस्व के जरिए उनका विकास हो सके। वहीं, अर्बन फाइनेंस एक्सपर्ट Dr. Ravikant Joshi ने सुझाव दिया है कि अगर स्थानीय निकायों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई और वित्तीय सुधार नहीं हुए, तो इस फंड का पूरा लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है।
महाराष्ट्र में पहले भी Nashik, Pune, Pimpri-Chinchwad और Nagpur जैसे नगर निगमों ने पानी और स्वच्छता के लिए सफलतापूर्वक फंड जुटाया है, इसलिए उम्मीद है कि अब छोटे शहर भी इसी रास्ते पर चलेंगे।