Maharashtra: राज्य सरकार ने कचरे के सही निपटारे और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘महाराष्ट्र स्टेट कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पॉलिसी, 2026’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की अध्यक्षता में
Maharashtra: राज्य सरकार ने कचरे के सही निपटारे और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘महाराष्ट्र स्टेट कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पॉलिसी, 2026’ को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी। इस योजना का मुख्य मकसद शहरों के कचरे और खेती के अवशेषों को साफ ईंधन में बदलना है ताकि प्रदूषण कम हो सके।
इस नई पॉलिसी की मुख्य बातें क्या हैं?
सरकार ने इस साल CBG प्रोजेक्ट्स के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इन प्रोजेक्ट्स को PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) और हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा। कचरे को गीले और सूखे श्रेणियों में अलग-अलग करना अनिवार्य होगा। प्रोजेक्ट की क्षमता के आधार पर कंपनियों को 10 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
प्रोजेक्ट्स का मैनेजमेंट और नियम कैसे होंगे?
राज्य स्तर पर Urban Development Department नोडल एजेंसी का काम करेगा, जो टेंडर और पैसों के इंतजाम की देखरेख करेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक स्टेट लेवल स्टीयरिंग कमेटी होगी, जबकि जिला स्तर पर कलेक्टर की अगुवाई में कमेटियां काम करेंगी।
| विवरण |
नियम/जानकारी |
| न्यूनतम कचरा जरूरत |
200 टन अलग किया हुआ ऑर्गेनिक कचरा प्रतिदिन |
| लक्ष्य |
हर तालुका में एक प्रोजेक्ट लगाने का लक्ष्य |
| मैनेजमेंट |
जिला स्तर पर कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन |
| भूमि नियम |
NA परमिशन की अनिवार्यता खत्म, ऑनलाइन प्रीमियम भुगतान की सुविधा |
आम लोगों और छोटे शहरों को क्या फायदा होगा?
छोटे शहरों और नगर निकायों को एक क्लस्टर में जोड़ा जाएगा ताकि सामूहिक रूप से प्रोजेक्ट चलाए जा सकें। इससे स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन बेहतर होगा और पर्यावरण को फायदा मिलेगा। साथ ही, राजस्व मंत्री Chandrashekhar Bawankule ने जमीन कन्वर्जन नियमों में ढील दी है, जिससे अब बिना NA परमिशन के भी काम आसान हो जाएगा।