Maharashtra : महाराष्ट्र सरकार अब ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने जा रही है। सरकार ने इसके लिए एक ड्राफ्ट कानून तैयार किया है, जिसमें लाइसेंस और परमिट को भाषा कौशल से जोड़ा गया है।
Maharashtra : महाराष्ट्र सरकार अब ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने जा रही है। सरकार ने इसके लिए एक ड्राफ्ट कानून तैयार किया है, जिसमें लाइसेंस और परमिट को भाषा कौशल से जोड़ा गया है। इस नियम के लागू होने के बाद ड्राइवरों को लाइसेंस पाने या उसे रिन्यू कराने के लिए मराठी भाषा की जानकारी देनी होगी।
नया नियम क्या है और कब से लागू होगा
होम (ट्रांसपोर्ट) विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के नियमों 4, 78 और 85 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने 24 अप्रैल 2026 को इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को जारी किया है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- 1 मई 2026 से मराठी भाषा की दक्षता अनिवार्य हो जाएगी।
- लाइसेंसिंग अधिकारी यह जांचेंगे कि आवेदक मराठी में बात कर पा रहा है या नहीं।
- नियम का पालन न करने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
- बिना जांच के लाइसेंस देने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।
- जनता के पास सुझाव और आपत्तियां भेजने के लिए 30 दिन का समय है।
ड्राइवरों का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद ऑटो-रिक्शा यूनियनों में नाराजगी है। मुंबई ऑटो-रिक्शामेन यूनियन और ACMSSKSM ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन का कहना है कि बुनियादी बातचीत काफी है और भाषा के टेस्ट को रोजी-रोटी से नहीं जोड़ना चाहिए। विरोध के तौर पर 28 अप्रैल को परिवहन मंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा और 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू होगा।
| पक्ष/व्यक्ति |
कहा गया बयान/स्टैंड |
| प्रताप सरनाईक (परिवहन मंत्री) |
बातचीत सुधारने के लिए यह जरूरी है, सरकार ट्रेनिंग में मदद करेगी। |
| शशंक शरद राव (यूनियन अध्यक्ष) |
भाषा टेस्ट से आजीविका प्रभावित होगी, बाइक टैक्सी को छूट क्यों नहीं। |
| हर्षवर्धन सपकाल (कांग्रेस) |
यह राजनीतिक फायदे के लिए उठाया गया एक चरम कदम है। |
| अबू आज़मी (सपा) |
इसका मकसद उत्तर भारतीय ड्राइवरों को बाहर निकालना है। |
| अरुण सावंत (शिवसेना) |
मराठी न बोलने वाले ड्राइवर 1 मई से परिणामों के लिए तैयार रहें। |
ट्रेनिंग और सहायता का क्या प्लान है
परिवहन विभाग उन ड्राइवरों की मदद के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रहा है जिन्हें मराठी नहीं आती। इसमें मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद जैसे संगठन मदद कर सकते हैं। मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ किया है कि यह प्रक्रिया बिना किसी दबाव के होगी ताकि गैर-स्थानीय ड्राइवर भी काम करना सीख सकें।