Maharashtra: महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने आज 1 मई 2026 से पूरे राज्य में ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस 100 दिनों के अभियान के तहत सभी 59 RTO ऑफिसों में लाइसेंस और परमिट की जांच होगी।
Maharashtra: महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने आज 1 मई 2026 से पूरे राज्य में ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस 100 दिनों के अभियान के तहत सभी 59 RTO ऑफिसों में लाइसेंस और परमिट की जांच होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ड्राइवर को बुनियादी मराठी भाषा आती है या नहीं। यह अभियान 15 अगस्त 2026 तक चलेगा।
क्या है यह अभियान और ड्राइवरों पर क्या होगा असर?
परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik ने बताया कि इसका मकसद यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बातचीत को आसान बनाना है। ड्राइवरों को मराठी का विद्वान होने की जरूरत नहीं है, बस इतनी जानकारी होनी चाहिए कि वे किराया और पते जैसी जरूरी बातें समझ सकें। 15 अगस्त तक किसी का लाइसेंस सिर्फ मराठी न आने की वजह से रद्द नहीं किया जाएगा। इस समय का इस्तेमाल ड्राइवरों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा, लेकिन इसके बाद परमिट रिन्यू कराने के लिए मराठी आना जरूरी होगा।
ट्रेनिंग और नियमों को लेकर क्या तैयारी है?
सरकार ने ड्राइवरों की मदद के लिए खास इंतजाम किए हैं। RTO ऑफिसों में गाइडबुक और सीखने के लिए जगह दी जाएगी। मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद जैसी संस्थाएं ड्राइवरों को भाषा सिखाने में मदद करेंगी। शुरुआत में ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने इसका विरोध किया था और 4 मई को हड़ताल की योजना बनाई थी, लेकिन सरकार के आश्वासन के बाद अब उन्होंने अपना समर्थन दिया है।
मुंबई के यात्रियों और ड्राइवरों के लिए क्यों है जरूरी?
मुंबई में करीब 2.8 लाख ऑटो और 20 हजार टैक्सी परमिट हैं, जिनसे लगभग पांच लाख ड्राइवर जुड़े हैं। इस अभियान से फर्जी लाइसेंस और अवैध रूप से चल रही टैक्सियों पर लगाम लगेगी। अधिकारियों का मानना है कि जब ड्राइवर और सवारी एक-दूसरे की बात समझेंगे, तो विवाद कम होंगे और सफर बेहतर होगा। अवैध रूप से शेयरिंग चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या मराठी न आने पर अभी लाइसेंस रद्द हो जाएगा?
नहीं, 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस अभियान के दौरान सिर्फ मराठी न जानने के आधार पर लाइसेंस रद्द नहीं होगा। यह समय ट्रेनिंग और सुधार के लिए दिया गया है।
ड्राइवरों को कितनी मराठी आनी चाहिए?
परिवहन मंत्री के अनुसार, ड्राइवरों को मराठी का विद्वान होने की जरूरत नहीं है। उन्हें बस इतनी ‘वर्किंग नॉलेज’ होनी चाहिए कि वे यात्रियों से किराए और लोकेशन के बारे में बात कर सकें।