Maharashtra: महाराष्ट्र के कल्याण में महात्मा फुले पुलिस ने एक गंभीर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है। अंबरनाथ के एक बीजेपी नेता के दो भतीजों सहित पांच लोगों पर अपने ही पिता की फर्जी वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी तैय
Maharashtra: महाराष्ट्र के कल्याण में महात्मा फुले पुलिस ने एक गंभीर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया है। अंबरनाथ के एक बीजेपी नेता के दो भतीजों सहित पांच लोगों पर अपने ही पिता की फर्जी वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करने का आरोप लगा है। यह पूरा मामला करोड़ों रुपये की 17 बेशकीमती संपत्तियों से जुड़ा है, जिसे हासिल करने के लिए कथित तौर पर बैकडेटेड स्टाम्प पेपर का इस्तेमाल किया गया था।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का यह पूरा मामला?
मृतक आनंदराव करंजुले की बेटी अर्चना करंजुले ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, उनके पिता आनंदराव की मृत्यु 6 जुलाई 2023 को हुई थी। अर्चना का आरोप है कि उनके भाइयों और अन्य आरोपियों ने पिता की मौत के बाद पुराने स्टाम्प पेपर का इंतजाम किया और उन पर पुरानी तारीखें डालकर फर्जी कागजात तैयार किए। इसका मकसद यह दिखाना था कि वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी पिता के जीवित रहते ही बनाई गई थी। अर्चना ने सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए जानकारी निकाली, जिससे स्टाम्प पेपर की तारीखों में गड़बड़ी का खुलासा हुआ।
किन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई है पुलिस में रिपोर्ट?
पुलिस ने इस मामले में कुल पांच लोगों को नामजद किया है। आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- प्रशांत करंजुले: आनंदराव के बेटे और बीजेपी पदाधिकारी के भतीजे।
- संतोष करंजुले: आनंदराव के दूसरे बेटे और प्रॉपर्टी कारोबारी।
- सुनंदा करंजुले: आनंदराव की पत्नी और आरोपियों की मां।
- अमित जैन और प्रदीप सिंह: फर्जी दस्तावेजों में गवाह के तौर पर शामिल व्यक्ति।
शिकायतकर्ता अर्चना करंजुले का कहना है कि कानूनी उत्तराधिकारी होने के नाते संपत्ति में उनका एक-चौथाई हिस्सा बनता है। आरोपियों ने कथित तौर पर इस हक को खत्म करने और संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए यह साजिश रची। कल्याण की महात्मा फुले पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस मामले में मुख्य आरोप क्या हैं?
आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने मृतक आनंदराव करंजुले की मौत के बाद बैकडेटेड स्टाम्प पेपर का उपयोग करके फर्जी वसीयत और पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई ताकि करोड़ों की 17 संपत्तियों पर मालिकाना हक जताया जा सके।
धोखाधड़ी का पता शिकायतकर्ता को कैसे चला?
शिकायतकर्ता अर्चना करंजुले ने आरटीआई (RTI Act) के तहत आवेदन कर स्टाम्प पेपर की जानकारी निकाली थी, जिससे पता चला कि कागजों पर दर्ज तारीखें संदिग्ध थीं और दस्तावेज पिता की मृत्यु के बाद तैयार किए गए थे।