Maharashtra में 4 साल में बंद हुई 12,000 छोटी इंडस्ट्रीज, मंत्री उदय सामंत ने विधानसभा में दी जानकारी
Maharashtra: राज्य के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) की हालत खराब है। पिछले चार सालों में करीब 12,000 छोटी फैक्ट्रियां और उद्योग बंद हो गए हैं। यह बात खुद राज्य के उद्योग मंत्री Uday Samant ने बुधवार को विधानसभा में स्वी
Maharashtra: राज्य के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) की हालत खराब है। पिछले चार सालों में करीब 12,000 छोटी फैक्ट्रियां और उद्योग बंद हो गए हैं। यह बात खुद राज्य के उद्योग मंत्री Uday Samant ने बुधवार को विधानसभा में स्वीकार की। उन्होंने बताया कि आर्थिक मंदी और कई बाहरी कारणों की वजह से उद्योगों को यह नुकसान झेलना पड़ा है।
मंत्री उदय सामंत ने कहा कि 12,000 यूनिट्स के बंद होने की खबरें काफी हद तक सही हैं। इसके पीछे उन्होंने कोविड-19 महामारी का असर, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को मुख्य वजह बताया। युद्ध की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ गई है, जिससे माल भेजने का खर्च (Freight cost) बढ़ गया है और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है।
छोटे कारोबारियों की मुश्किलों को देखते हुए राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं। दिसंबर 2025 में नई औद्योगिक नीति लाई गई थी, जिसके तहत बंद पड़ी यूनिट्स को फिर से चालू करने के लिए वित्तीय मदद और इंसेंटिव दिए जा रहे हैं। सरकार ने इसके लिए एक खास ‘MSME रिवाइवल एंड रिहैबिलिटेशन फंड’ बनाया है, जिसमें बिजली बिल में छूट और ब्याज सब्सिडी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
सरकार ने उद्योगों की मदद के लिए कुछ और बड़े फैसले भी लिए हैं:
| योजना/फैसला | मुख्य लाभ |
|---|---|
| MSME Commissionerate | मुंबई में मुख्य ऑफिस और हर जिले में सेंटर बनेंगे ताकि शिकायतों का निपटारा हो सके। |
| औद्योगिक प्लॉट | MSMEs के लिए प्लॉट की कीमत में 20% की छूट दी जाएगी। |
| Maitri पोर्टल | सभी जरूरी मंजूरियां अब 30 दिनों के भीतर मिलेंगी। |
| जनता दरबार | जुलाई 2026 से बड़े अधिकारी जिलों का दौरा कर उद्योगपतियों की समस्याएं सुनेंगे। |
| एक्सपोर्ट पॉलिसी 2026 | निर्यात करने वाले उद्योगों को 40-60% तक कैपिटल सब्सिडी (100 करोड़ तक) मिलेगी। |
हालांकि, इन सबके बीच कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2 करोड़ रुपये से कम लोन लेने वाले छोटे कारोबारियों पर दबाव बढ़ रहा है। बिजली नियमों में बार-बार बदलाव और घरेलू मांग में कमी की वजह से भी छोटे उद्योगों को अपना काम चलाने में दिक्कत आ रही है।