Thane Ring Metro प्रोजेक्ट पर बढ़ रहा था विरोध, अब जनता और प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी महाराष्ट्र सरकार
Maharashtra/Thane : ठाणे में प्रस्तावित 29 किलोमीटर लंबे इंटीग्रल रिंग मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को लेकर काफी विवाद हो रहा है। अब इस मामले को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कदम उठाया है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार
Maharashtra/Thane : ठाणे में प्रस्तावित 29 किलोमीटर लंबे इंटीग्रल रिंग मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को लेकर काफी विवाद हो रहा है। अब इस मामले को सुलझाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कदम उठाया है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को बताया कि सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर लोगों की शंकाओं और आपत्तियों को दूर करने के लिए स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक करेगी।
विधायक अभिजीत वंजारी और निरंजन दावखरे ने विधान परिषद में इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता और इसके असर पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया। मंत्री उदय सामंत ने कहा कि ठाणे जिला कलेक्टर एक महीने के भीतर इन बैठकों का आयोजन करेंगे। इन मीटिंग्स में जन प्रतिनिधि, मेट्रो अधिकारी और नागरिक प्रशासन के लोग शामिल होंगे। सामंत ने इस प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि यह भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया ट्रांसपोर्ट सिस्टम है और इसका 9 प्रतिशत काम शुरू हो चुका है।
आने वाली बैठकों में इस बात पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया जाएगा कि यह रिंग मेट्रो, मुंबई मेट्रो लाइन 4 और लोकल ट्रेन नेटवर्क से कैसे जुड़ेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 12,200 करोड़ रुपये है, जिसमें 22 स्टेशन होंगे। इनमें से 20 स्टेशन ऊंचाई पर और 2 स्टेशन जमीन के नीचे होंगे। केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 में और राज्य सरकार ने सितंबर 2024 में इसे मंजूरी दी थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अक्टूबर 2024 को इसकी नींव रखी थी। सरकार का लक्ष्य इसे 2029 तक पूरा करने का है।
हालांकि, इस प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध हो रहा है। उपवन इंडस्ट्रियल एस्टेट के व्यापारियों का कहना है कि बिना उनसे सलाह लिए रूट तय किया गया, जिससे उनके बिजनेस पर असर पड़ेगा। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का दावा है कि इससे करीब 5,380 मैंग्रोव और 3,000 से ज्यादा पेड़ कटेंगे। साथ ही संजय गांधी नेशनल पार्क के ईको-सेंसिटिव जोन पर भी खतरा है। पुराने ठाणे के निवासियों को डर है कि पुरानी इमारतों के नीचे टनल बनाने से खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने इसे सरकारी पैसे की बर्बादी बताते हुए इलेक्ट्रिक बसों जैसे विकल्पों का सुझाव दिया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रोजेक्ट की लंबाई | 29 किलोमीटर |
| कुल स्टेशन | 22 (20 एलिवेटेड, 2 अंडरग्राउंड) |
| अनुमानित लागत | 12,200 करोड़ रुपये |
| पूरा होने का लक्ष्य | 2029 |
| मुख्य चिंताएं | पेड़ों की कटाई, मैंग्रोव का नुकसान और विस्थापन |