UP : लखनऊ में 19 मई 2026 को तीसरे बड़े मंगल के मौके पर शहर भर में 370 से ज्यादा भंडारों का आयोजन हुआ। नगर निगम लखनऊ ने इसे ‘जीरो वेस्ट इवेंट’ बनाने के लिए खास तैयारी की थी ताकि भंडारों के बाद सड़कों पर कूड़ा
UP : लखनऊ में 19 मई 2026 को तीसरे बड़े मंगल के मौके पर शहर भर में 370 से ज्यादा भंडारों का आयोजन हुआ। नगर निगम लखनऊ ने इसे ‘जीरो वेस्ट इवेंट’ बनाने के लिए खास तैयारी की थी ताकि भंडारों के बाद सड़कों पर कूड़ा न फैले। इस बार ज्येष्ठ माह में 19 साल बाद आठ बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने स्वच्छता पर ज्यादा जोर दिया है।
जीरो वेस्ट भंडारे के लिए क्या नियम बनाए गए
नगर निगम ने आयोजकों के लिए नियम तय किया था कि वे 24 घंटे पहले हेल्पलाइन नंबर 1533 या ‘लखनऊ वन’ ऐप के जरिए सूचना दें। आयोजकों से सिंगल यूज प्लास्टिक और डिस्पोजेबल बर्तनों की जगह पत्तल और मिट्टी के कुल्हड़ों का इस्तेमाल करने को कहा गया। नियमों का पालन न करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया था। साथ ही, गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए ‘4-बिन अवधारणा’ के तहत डस्टबिन लगाने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन और जलकल विभाग ने क्या इंतजाम किए
नगर आयुक्त गौरव कुमार और महापौर सुषमा खर्कवाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि भंडारों के बाद कहीं भी कचरा जमा न हो। जलकल विभाग ने श्रद्धालुओं के लिए 79 मुख्य जगहों पर पानी के टैंकर लगाए और हर जोन में एक अतिरिक्त टैंकर रखा। जोन-5 के गीता पल्ली और जोन-7 के लोहिया नगर वार्ड में सफाई वाहनों और टीमों की विशेष तैनाती रही ताकि कचरा तुरंत हटाया जा सके।
पर्यावरण और शोर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए
मंगलमान अभियान के स्वयंसेवकों ने भंडारों का दौरा कर लोगों को प्लास्टिक मुक्त रहने और कचरा अलग करने की सलाह दी। आरएसएस के पर्यावरण सह संयोजक राकेश जैन ने स्टील के बर्तनों और कपड़े के थैलों के उपयोग पर जोर दिया। इसके अलावा, ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पर्यावरण मंत्रालय के मानकों के अनुसार समय और आवाज की सीमा तय की गई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में जीरो वेस्ट भंडारे के लिए आयोजकों को क्या करना था
आयोजकों को कम से कम 24 घंटे पहले हेल्पलाइन नंबर 1533 या ‘लखनऊ वन’ ऐप के माध्यम से नगर निगम को सूचित करना अनिवार्य था।
कचरा प्रबंधन के लिए कौन सी तकनीक अपनाई गई
गीले, सूखे, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग करने के लिए ‘4-बिन अवधारणा’ का उपयोग किया गया और बायोडिग्रेडेबल विकल्पों को बढ़ावा दिया गया।