Lucknow में राज्य स्तरीय कार्यशाला, अब पंचायत योजनाओं से जुड़ेगा बच्चों का विकास और प्रारंभिक शिक्षा
Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शुरुआती विकास को ग्राम पंचायत की योजनाओं से जोड़ना है। सरकार का ध्यान इस बात पर है कि प्रारंभिक
Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शुरुआती विकास को ग्राम पंचायत की योजनाओं से जोड़ना है। सरकार का ध्यान इस बात पर है कि प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल को पंचायत स्तर पर मजबूत किया जाए ताकि ग्रामीण बच्चों को बेहतर भविष्य मिल सके।
कार्यशाला में इस बात पर चर्चा हुई कि बच्चे के जीवन के शुरुआती 6 साल सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान बच्चे के दिमाग का लगभग 80 फीसदी विकास हो जाता है। अगर इस उम्र में बच्चों को सही पोषण, सुरक्षा और उचित देखभाल नहीं मिली, तो उनके विकास में रुकावट आ सकती है। इसी वजह से अब बाल विकास सेवाओं को पंचायत स्तर की प्लानिंग में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश का महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) ने भी पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर बाल हितैषी ग्राम पंचायतों को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है। राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD) भी इस दिशा में ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण में मदद कर रहा है।
सरकार की योजना के तहत ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) में अब महिला सभा और बाल सभा के आयोजन को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजनाएं बनाते समय बच्चों और महिलाओं की जरूरतों को रखा जाए। इसके अलावा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के जरिए पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए ई-पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट जैसे डिजिटल बदलाव भी किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार की इस पहल में महिला कल्याण, बाल विकास और पोषाहार मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य और राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिभा शुक्ला की सक्रियता बनी हुई है। मिशन वात्सल्य पोर्टल जैसी सुविधाओं के जरिए बाल सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।