Lucknow में महिलाएं बना रहीं 5 लाख तिरंगे, एक झंडे पर मिल रहे 3 रुपये
Lucknow: स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच लखनऊ के गांवों में सिलाई मशीनों की गूंज बढ़ गई है। यहां की महिलाएं दिन-रात मेहनत कर तिरंगे तैयार कर रही हैं ताकि आजादी के पर्व पर पूरे शहर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा सके। यह
Lucknow: स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच लखनऊ के गांवों में सिलाई मशीनों की गूंज बढ़ गई है। यहां की महिलाएं दिन-रात मेहनत कर तिरंगे तैयार कर रही हैं ताकि आजादी के पर्व पर पूरे शहर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा सके। यह काम न केवल देशभक्ति से जुड़ा है बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए कमाई का जरिया भी बन गया है।
लखनऊ के सिकंदरपुर खुर्द गांव में रेणु और गुड्डी यादव समेत करीब 150 महिलाएं इस काम में जुटी हैं। ये महिलाएं कुल 5 लाख तिरंगे झंडे तैयार कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें प्रति झंडा 3 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के तहत चलाई जा रही है।
इस अभियान का दायरा केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 30,000 ग्रामीण महिलाएं 2 करोड़ राष्ट्रीय ध्वज बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही हैं, जिनमें से 1.90 करोड़ झंडे तैयार हो चुके हैं। इस काम में 6,000 महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) शामिल हैं।
लखनऊ के चिनहट विकासखंड में आने वाले जुग्गौर और सिकंदरपुर गांवों की इकाइयों का निरीक्षण मिशन निदेशक अरुण कुमार ने किया। यहां के तुलसी मां, छोटे साहेब और बजरंगबली जैसे स्वयं सहायता समूहों को कुल 1.5 लाख झंडे बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का मकसद लोगों को अपने घरों में तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित करना है। तैयार किए गए इन झंडों को ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों और स्कूलों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। यह पहल भारतीय ध्वज संहिता 2002 के नियमों के अनुसार की जा रही है, जिसमें मशीन और हाथ से बने सूती या पॉलिएस्टर झंडों की अनुमति है।