Lucknow के VVIP इलाकों में सीवर ओवरफ्लो और गंदा पानी, विधानसभा के पास रहने वाले लोग परेशान

Lucknow: राजधानी के सबसे वीवीआईपी इलाकों में रहने वाले लोग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उदयगंज और सचिवालय कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में सीवर ओवरफ्लो और दूषित पानी की समस्या इतनी बढ़ गई है कि सड़कों पर गंदगी

Lucknow: राजधानी के सबसे वीवीआईपी इलाकों में रहने वाले लोग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उदयगंज और सचिवालय कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में सीवर ओवरफ्लो और दूषित पानी की समस्या इतनी बढ़ गई है कि सड़कों पर गंदगी बह रही है और घरों के नलों से गंदा पानी आ रहा है। विधानसभा के बगल में रहने वाले लोग साफ पानी न मिलने और पार्कों में फैली गंदगी से बेहद परेशान हैं।

शहर के कई इलाकों में यह समस्या पिछले आठ महीनों से बनी हुई है। सचिवालय कॉलोनी, मुरलीनगर, क्ले स्क्वायर और जानकीपुरम जैसे क्षेत्रों में लोग दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति झेल रहे हैं। हालत यह है कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सेहत बिगड़ रही है और लोग पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइनें दशकों पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं।

इस लापरवाही पर प्रशासन भी अब हरकत में आया है। 14 जून 2026 को मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने जलकल विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने पाया कि कई शिकायतों को बिना समाधान किए ही फर्जी तरीके से निस्तारित दिखा दिया गया था। मंडलायुक्त ने चेतावनी दी है कि शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

वहीं, जलकल महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने सीवर सफाई का काम संभालने वाली निजी कंपनी सुएज इंडिया को कड़ा नोटिस जारी किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि काम में सुधार नहीं हुआ तो कंपनी के बिल में कटौती की जाएगी। महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी पार्षदों को निर्देश दिए हैं कि वे पानी और सीवर से जुड़ी समस्याओं को लिखित रूप में दें ताकि उनका स्थाई समाधान हो सके।

नगर निगम ने कल्याण सिंह और लालजी टंडन वार्डों में ‘जन चौपाल’ लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी हैं। दूसरी ओर, शक्तिनगर तिकोनिया गार्डन और ए-ब्लॉक सचिवालय कॉलोनी के निवासियों ने पेयजल संकट को लेकर जल संस्थान कार्यालय का घेराव भी किया। आंकड़ों की बात करें तो पिछले छह महीनों से सीवर से जुड़ी करीब 420 शिकायतें लंबित हैं, जबकि इन कामों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।