UP: लखनऊ के नरही इलाके में स्थित 90 साल पुराने विद्या गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार, 8 जून 2026 को ADM के आदेश के बाद भी स्कूल नहीं खुल सका। स्कूल मैनेजर का आरोप है कि पुलिस ने स्कूल का ताला ख
UP: लखनऊ के नरही इलाके में स्थित 90 साल पुराने विद्या गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल को लेकर विवाद गहरा गया है। सोमवार, 8 जून 2026 को ADM के आदेश के बाद भी स्कूल नहीं खुल सका। स्कूल मैनेजर का आरोप है कि पुलिस ने स्कूल का ताला खोलने के लिए ‘पुलिस फीस’ की मांग की और बिना पैसों के मदद करने से मना कर दिया।
स्कूल दोबारा क्यों नहीं खुल पाया
स्कूल की मैनेजर संतोष रस्तोगी के मुताबिक, जब वह ADM कोर्ट के आदेश के साथ स्कूल खोलने पहुंचीं, तो पुलिस ने सहयोग नहीं किया। इससे पहले DIOS ने ADM कोर्ट में सबूत पेश किए थे, जिसके बाद विपक्षी पार्टी के पक्ष में दिया गया पुराना आदेश रद्द हो गया था। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय मंत्री डॉ. आर.पी. मिश्रा ने पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की है।
विवाद की मुख्य वजह क्या है
यह पूरा मामला स्कूल के कब्जे को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। पहले एक आदेश के आधार पर स्कूल को खाली कराया गया था, जिसके विरोध में छात्रों और अभिभावकों ने धरना प्रदर्शन भी किया था। अब जब दोबारा स्कूल खोलने का आदेश आया है, तो पुलिस नियमों का हवाला दे रही है। मैनेजर ने यह शिकायत भी की है कि आदेश की कॉपी उन्हें मिलने से पहले विपक्षी पार्टी को दे दी गई थी।
लखनऊ में स्कूलों के लिए फीस के नियम
इस विवाद के बीच जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों के लिए फीस के कड़े नियम लागू किए हैं। यूपी सेल्फ-फाइनेंस्ड इंडिपेंडेंट स्कूल्स (फीस रेगुलेशन) एक्ट 2018 के तहत स्कूलों को फीस बढ़ोतरी 7.55% तक सीमित रखनी होगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी स्कूल द्वारा जबरन किताबें या यूनिफॉर्म बिकवाना गलत है और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विद्या गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल क्यों नहीं खुल सका?
ADM के आदेश के बावजूद स्कूल नहीं खुल पाया क्योंकि मैनेजर का आरोप है कि पुलिस ने ताला खोलने के लिए ‘पुलिस फीस’ मांगी और बिना भुगतान के मदद करने से इनकार कर दिया।
लखनऊ में निजी स्कूलों के लिए फीस वृद्धि की क्या सीमा है?
जिला प्रशासन के नियमों के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए निजी स्कूल फीस में अधिकतम 5% और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मिलाकर कुल 7.55% तक ही बढ़ोतरी कर सकते हैं।