Lucknow के विभूति खंड में अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 119 लोग गिरफ्तार
Lucknow: राजधानी के पॉश इलाके विभूति खंड की समिट बिल्डिंग में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। 1 जुलाई की देर रात की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 119 लोगों को गिरफ्तार किया है।
Lucknow: राजधानी के पॉश इलाके विभूति खंड की समिट बिल्डिंग में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। 1 जुलाई की देर रात की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 119 लोगों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि जिस बिल्डिंग में यह फर्जीवाड़ा चल रहा था, उसी के नीचे पुलिस चौकी मौजूद थी, फिर भी लंबे समय तक किसी को इसकी खबर नहीं लगी।
यह पूरी कार्रवाई लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस की साइबर क्राइम सेल और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम ने की है। समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर ‘सोलारिस सॉल्यूशन’ नाम से यह सेंटर चल रहा था। यहाँ से 92 पुरुषों और 27 महिलाओं को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक यह सेंटर पिछले छह महीने से एक साल के बीच से काम कर रहा था। इस गिरोह के मुख्य मैनेजर के तौर पर अहमदाबाद के ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार की पहचान हुई है, जबकि विनीत शर्मा पर पैसों के लेन-देन को संभालने का आरोप है।
यह गिरोह अमेरिका के लोगों को अपना निशाना बनाता था। ये लोग खुद को अमेज़न, एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और एफबीआई जैसी बड़ी एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। पीड़ितों को फर्जी ईमेल और मैसेज भेजकर डराया जाता था और ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी जाती थी। इसके बाद उन्हें डॉलर ऐप जैसे एप्लिकेशन डाउनलोड करने या बैंक की जानकारी देने के लिए मजबूर किया जाता था। पैसों के लेन-देन के लिए बैंक खातों के बजाय गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर का इस्तेमाल किया जाता था ताकि पुलिस इन्हें पकड़ न सके।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल गिरफ्तार लोग | 119 (92 पुरुष, 27 महिला) |
| अनुमानित धोखाधड़ी | ₹45 करोड़ से ₹250 करोड़ के बीच |
| जब्त लैपटॉप | 103 |
| जब्त मोबाइल फोन | 177 |
| कर्मचारियों का वेतन | ₹30,000 से ₹40,000 + 10% कमीशन |
| मुख्य संदिग्ध | ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार |
पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान, वीओआईपी कॉलिंग सिस्टम, आईबीम डायलर और विदेशी नागरिकों का डेटाबेस बरामद किया है। पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर और एडीजीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि यह धोखाधड़ी एक सोचे-समझे चार-स्तरीय मॉडल पर आधारित थी। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब जब्त किए गए उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि अमेरिका में बैठे इनके साथियों और पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।