UP: लखनऊ में शनिवार, 16 मई 2026 को विवाहित महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ वट सावित्री व्रत मनाया। सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख के लिए वट वृक्ष की पूजा की और बरगद के
UP: लखनऊ में शनिवार, 16 मई 2026 को विवाहित महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ वट सावित्री व्रत मनाया। सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख के लिए वट वृक्ष की पूजा की और बरगद के पेड़ पर पवित्र सूत्र बांधा। ज्येष्ठ महीने में आने वाला यह व्रत शादीशुदा महिलाओं के लिए बहुत खास माना जाता है।
वट सावित्री व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त और समय
ज्योतिष गणना के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 05:12 बजे शुरू हुई, जो देर रात 01:31 बजे तक रही। पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 07:12 से 08:24 बजे तक था, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:45 बजे तक रहा। उदयातिथि के कारण यह व्रत शनिवार को ही रखा गया।
पूजा की विधि और जरूरी नियम
महिलाओं ने सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया और नए कपड़े पहनकर सिंदूर और श्रृंगार किया। पूजा के लिए सावित्री-सत्यवान की मूर्ति, कलश, फल, फूल, धूप-दीप और कच्चे सूत के धागे का इस्तेमाल किया गया। वट वृक्ष पर जल चढ़ाने के बाद रोली, हल्दी और अक्षत लगाए गए। इसके बाद 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए लाल कलावा या सफेद सूत बांधा गया। व्रत की कथा सुनने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया गया और भीगे काले चने व जल से व्रत खोला गया।
शनिवार को व्रत होने का विशेष महत्व
सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मंदिर के ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे ने बताया कि इस बार शनिवार को अमावस्या होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जा रही है, जिससे यह दिन शनि देव की शांति और प्रसन्नता के लिए बहुत फलदायी हो गया है। यदि किसी के पास बरगद का पेड़ नहीं था, तो उन्होंने उसकी शाखा या चित्र की पूजा की।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वट सावित्री व्रत 2026 कब मनाया गया?
वट सावित्री व्रत शनिवार, 16 मई 2026 को मनाया गया। इस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि थी।
वट वृक्ष की पूजा का क्या महत्व है?
विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं और उस पर सुरक्षा का प्रतीक सूत बांधती हैं।